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झारखण्ड : 23 बच्चों को नक्सलियों के गढ़ से पुलिस छुडाया

गुमला: गुमला पुलिस ने पीर को नक्सलियों के गढ़ माने जानेवाले जमटी गांव से 23 बच्चों को निकाल बिशुनपुर ले आयी. इनमें 13 लड़कियां हैं. सभी बच्चों की उम्र 10 से 17 साल के बीच है. जमटी गांव के इन बच्चों को भाकपा माओवादी के हार्डकोर नक्सली नकुल यादव ने गाँव वालों से मांगा था, ताकि वह नक्सली बाल दस्ता बना सके. नक्सलियों की तरफ से बच्चा मांगे जाने के बाद से अहले खाना दहशत में थे. नक्सली बच्चों को अपने साथ ले जाते, उससे पहले डीआइजी आरके धान व एसपी भीमसेन टुटी की कियादत में पुलिस फोर्स गांव में घुसी और गांव के तामम बच्चों को अपने हिफाज़त में ले लिया. अभी बच्चे पुलिस की निगरानी में हैं. इन बच्चों को पुलिस पढ़ायेगी. गुमला के हॉस्टल में बच्चों को रखा जायेगा, ताकि वे इंटर तक फ्री तालीम हासिल कर सकें.

सोमवार को डीआइजी आरके धान, एसपी भीमसेन टुटी, एएसपी पवन कुमार सिंह व सीआरपीएफ के सीओ भीपी सिंह पुलिस फोर्स के साथ जमटी गांव पहुंचे. पूरे गांव में पहले सर्च ऑपरेशन चलाया. ग्रामीणों से बात की. डीआइजी ने ग्रामीणों से बात कर बच्चों के भविष्य के लिए उन्हें पढ़ाने के लिए अपने साथ भेजने की अपील की. परिजन इस डर से कि नक्सली ले जायें, इससे अच्छा है कि बच्चे पुलिस संरक्षण में रह कर पढ़ाई-लिखाई करें. इसलिए परिजन बच्चों को पुलिस के साथ भेजने पर राजी हाे गये.

गांववालों की तरफ से बच्चे नहीं दिये जाने के बाद 15 दिन पहले माओवादियों ने जमटी गांव को तीन दिन तक नजरबंद रखा था. माओवादी गांव में ही कैंप करने लगे थे. जंगल से लकड़ी काटने पर रोक लगा दी थी. सूखी लकड़ी ले जाने पर 250 रुपये वसूल रहे थे. नक्सलियों ने हरेक परिवार से एक बच्चा मांगा था. इससे गाँव वाले खौफ में जी रहे थे.
इत्तिला है कि नक्सली बोरहा गांव से एक बच्चे को अपने साथ जबरन ले गये हैं. पांच दिन पहले नक्सली बोरहा पहुंचे थे. एक व्यक्ति से बच्चा मांगा था. परिजनों ने इनकार किया, नक्सली बंदूक के बल पर ले गये.

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