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टाटा संस ने साइरस मिस्त्री के आरोपों का किया खंडन, लगाया वित्तीय नुकसान पहुंचाने का आरोप

मुंबई: टाटा संस ने अपने पूर्व साइरस मिस्त्री के उन आरोपों का खंडन किया है जिसमें उन्होंने कहा था कि कंपनी का प्रबंधन करने वाले ट्रस्टों के संचालन में कमियां हैं। सोमवार को मिस्त्री पर पलटवार करते हुए कंपनी ने कहा कि टाटा समूह के ट्रस्टों का संचालन जमशेदजी टाटा और उनके दो बेटों की व्यक्तिगत वसीयतों से होता है। इसके साथ ही कंपनी ने मिस्त्री पर कंपनियों को भारी वित्तीय नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है।

अपने बयान में टाटा संस ने कहा है कि मिस्त्री के बयानों से इस औद्योगिक घराने और उनकी कंपनियों को भारी नुकसान हुआ है और सभी शेयरधारकों को हजारों करोड़ रुपये का भारी वित्तीय नुकसान हुआ है। जिन कंपनियों को नुकसान हुआ है। इनमें वो कंपनियां भी शामिल हैं जिनके चेयरमैन मिस्त्री अभी बने हुए हैं।

टाटा संस ने कहा है कि ट्रस्टों का संचालन जमशेदजी टाटा, उनके बेटे सर दोराबजी टाटा और रतन टाटा तथा दूसरे संस्थापकों की निजी वसीयतों से होता है। ये ट्रस्ट इन वसीयतों में तय उद्देश्यों का पालन कर रहे हैं। यही कारण है कि विभिन्न ट्रस्ट दशकों से काम कर रहे हैं। इनमें से अनेक ट्रस्टों में रतन टाटा आजीवन चेयरमैन हैं। इन ट्रस्टों की टाटा संस में 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
साइरस मिस्त्री ने सोमवार को कहा था कि टाटा समूह किसी एक व्यक्ति की जागीर नहीं है और इसका भविष्य टाटा घराने के ट्रस्टों के संचालन पर निर्भर करता है। उन्होंने ट्रस्टों के संचालन में कथित कमियों का आरोप लगाते हुए सरकार से अपील की कि वह इन ट्रस्टों की संचालन व्यवस्था में आई गड़बड़ियों का उपचार कर उन्हें ठीक करे। उन्होंने कहा कि फैसला करने का पूरा अधिकार किसी एक व्यक्ति के हाथ में नहीं दिया जाना चाहिए। सभी अधिकार किसी एक व्यक्ति या हाई कमांड के हाथ में थमा देना अनैतिक, अनुचित और अमानत में खयानत है।
गौरतलब है कि मिस्त्री को अक्तूबर महीने में टाटा संस के चेयमैन पद से अचानक से हटा कर पूर्व चेयरमैन रतन टाटा को कंपनी का अंतरिम चेयरमैन बना दिया गया था। उसके बाद से मिस्त्री और टाटा संस के खेमे के बीच खींचतान चल रही है।

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