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टीपू सुल्तान पिछले 500 सालों के सबसे महान व्यक्ति हैं: गिरीश कर्नाड

गिरीश कर्नाड

टीपू सुल्तान के पक्ष में बोलने को लेकर जनन पीठ पुरुस्कार सम्मानित नाटककार गिरीश कर्नाड को ट्विटर पर जान से मारने की धमकी मिली है। उनको टीपू सुल्तान की शासकीय व्यवस्था की प्रशंसा करने को लेकर एम.एम. कलबुर्गी की तरह हत्या कर देने की चेतावनी दी गई है। इस मामले पर इंडिया टुडे टेलेविज़न के सलाहकार संपादक राजदीप सरदेसाई ने गिरीश कर्नाड से बात की। साक्षत्कार के प्रमुख अंश।

टीपू सुल्तान पर की गई आपको अपनी टिप्पणी पर, ख़ासकर बेंगलुरु एयरपोर्ट का नाम टीपू सुल्तान के नाम पर रखने का सुझाव देने पर खेद है?

मुझे दुःख है कि इस पर विवाद उत्पन्न हुआ। मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं था। मैंने सलाह दी थी क्योंकि टीपू सुल्तान का जन्म देवनाहल्ली में हुआ था। अगर एयरपोर्ट का नाम उनके नाम पर होता तो ज़्यादा बेहतर होता। मैंने ये नहीं कहा था कि एयरपोर्ट का नाम बदल दिया जाए। उसके शुरू होने से पहले टीपू सुल्तान जयंती पर उनका नाम दे दिया जाए। मेरे इस बात को पत्रकारों ने ग़लत तरीके से समझा। मुझे अपने किसी टिप्पणी पर खेद नहीं है, बल्कि यह बिना किसी कारण के उत्पन्न हुए विवाद पर खेद है।

अगर इसमें क्षमा-याचना जैसा कुछ नहीं है तो अपने माफ़ी क्यों मांगी क्या यह किसी दबाव या धमकी के चलते हुआ?

मैंने माफ़ी मांगी, क्योंकि प्रशासन के कुछ लोग जिनका नाम मैं नहीं लूंगा, ने कहा था कि अगर मैं अपने बयान को सही तरह से लोगों को समझा दूंगा तो विवाद और लोगों का गुस्सा कम हो जाएगा। मैंने अपने बयान के लिए क्षमा नहीं मांगी है, बल्कि विवाद उत्पन्न होने के कारण मांगी है।

आपने कहा कि आपने जो टीपू सुल्तान पर टिप्पणी की वो साधारण थी पर आपको नहीं लगता कि आप ग़लत हैं, खा़सकर कर्नाटक में टीपू को उनके शख्सियत के विपरीत तानाशाह माना जाता है?

मैं टीपू सुल्तान को देशभक्त मानता हूं, बल्कि मैं उनके लिए देशभक्त शब्द भी प्रयोग नहीं करूंगा। मेरे अनुसार वो एक महान शासक थें। महान विचारक थें। महान रणनीतिकार थे। और उन्होंने कर्नाटक के लिए बहुत कुछ किया। मैं उनकी सराहना करता हूं। मेरे अनुसार वो विजयनगर के पराजय के बाद पिछले 500 सालों के सबसे महान कांनादिगास हैं। जो कुछ उन्होंने कर्नाटक के लिए किया वो बताने की ज़रूरत नहीं है।

टीपू के इतिहास का एक और पहलू है जो उनको हिन्दुओं के उत्पीड़न करने के तौर पर दिखाता है, इसपर आपका क्या कहना है, क्योंकि यह भी विवाद का एक कारण है?

हां, लेकिन उन्होंने मोप्लास की भी हत्या की, जो मुस्लिम थे। 18वीं सदी का वह शासन इस दौर से शासन से एकदम भिन्न था। उस समय केरला, कुर्ग, मैसूर और महाराष्ट्र अलग देश थे। इसलिए मैंने टीपू को कांनादिग कहा। अब इनको भारतीय पहचान मिल गई है। बहुत सारे आंदोलन में वो निर्दयी रहे लेकिन उस समय सभी मराठा निर्दयी होते थे। मैं मराठा या टीपू पर कोई इल्ज़ाम नहीं लगा रहा हूँ। लेकिन आज के इस 21वीं सदी में आप लोग उनके अच्छे और बुरे होने का निर्णय नहीं कर सकते। जो कुछ उन्होंने देश के लिए उसके लिए उनकी सराहना की जानी चाहिए।

कर्नाटक सरकार ने टीपू सुल्तान की जयंती मनाने का फैसला लिया है हालांकि जयंती 20 नवंबर को है मगर आयोजन 10 नवंबर रखा गया है। क्या आपको नहीं लगता यह ग़लत रास्ते पर चलने जैसा है।

यह प्रदेश का फैसला है मेरा कोई इससे संबंध नहीं है।  यह मुख्यमंत्री का फैसला है। मैं जन्मदिन घर पर नहीं मानता हूं। मैं वैसे जन्मदिन मनाने में यकीन ही नहीं रखता।

क्या आप इसे वोट बैंक की गंदी राजनीति के तौर पर नहीं देखते हैं, जहां हिंदुओं को मुस्लिमों के खिलाफ़ भड़काया जा रहा है?

इसके ऊपर मैं कोई टिप्पणी नहीं करूँगा।  सब की अपनी-अपनी ज़िम्मेदारी हैं। अपनी-अपनी रणनीति है। अपना तरीका है। हम सब खेल ही खेलते हैं। प्रदेश के मुख्यमंत्री की भी अपनी अलग रणनीति हो सकती है। मैं उनको किसी तरह का कोई सुझाव नहीं दूंगा।

आपको नहीं लगता कि कर्नाटक सरकार को टीपू सुल्तान जयंती आयोजन के अलावा कुछ और बेहतर चीज़ करनी चाहिए यह किसान आत्महत्याओं और कृषिक समस्याओं का प्रदेश हैं?

हो सकता है। लेकिन मेरा इससे कोई संबंध नहीं है। इसके ऊपर मुझे कोई टिप्पणी नहीं करनी है।

आपकी हत्या कर देने धमकी मिली है। क्या इसलिए आप टीपू जयंती आयोजन पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते?

बिल्कुल, जिस भाषा का प्रयोग बिहार के नेताओं के द्वारा किया जाता है वो तो और भी बेकार है।  मुझे अभी उस तरह से गालियां सुनने का मौका नहीं मिला है। मैं ट्विटर और फेसबुक का प्रयोग नहीं करता। लेकिन हर व्यक्ति जो टीपू को पसंद नहीं करता उसको जश्न मनाने का और उनके बारे में लिखने का अधिकार है।

कुछ लोगों का कहना है कि आपने हिन्दु धर्म के एक समुदाय की भावना को ठेस पहुंचाई है इसपर आपकी क्या प्रतिक्रिया है?

कर्णाटक में टीपू सुल्तान की सराहना में बदुत से लोगों ने नाटक किए हैं। मैं पहला नहीं हूँ। उन पर मैंने पहला प्ले 8 साल की आयु में देखा था। यहां तक की छोटे शहरों के नाटकारों ने भी उनके बारे में बहुत कुछ लिखा हैं। वो लोक हीरो हैं।

महाराष्ट्र में शिवाजी जयंती है क्या कर्नाटक में टीपू जयंती होनी चाहिए या आप शिवाजी जयंती के खिलाफ हैं?

मैं यह नहीं कह सकता कि शिवाजी जयंती होनी चाहिए या नहीं होनी चाहिए। यह सब लोगों पर निर्भर करता है।

आपको लगता है कि अगर 20 साल पहले आपने इसी तरह टीपू के मुद्दे पर बात की होती तो इस तरह से प्रतिक्रिया मिलती?

जहां तक मुझे लगता है जिस तरह की प्रतिक्रिया मुझे मिली है वो फेसबुक और ट्विटर के इतने लोकप्रिय होने के कारण है। घृणा 20 साल पहले भी लोगों के बीच थी। लेकिन तब लोग सोशल मीडिया पर इतनी जल्दी अपनी प्रतिक्रिया नहीं दे पाते थे। आज के समय में टीवी चैनलों के पास भी सामग्री की कमी है, इसलिए वो कुछ भी उठा कर दिखाते हैं।

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