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टी आर एस हुकूमत12% तहफ़्फुज़ात का मस्ला मोदी के दरबार में पेश करेगी!

हैदराबाद 08 अक्टूबर: चीफ़ मिनिस्टर के चंद्रशेखर राव‌ ने भी एसा महसूस होता हैके दूसरों की तरह मुस्लमानों से 12फ़ीसद तहफ़्फुज़ात का सिर्फ वादा किया है और वोट हासिल करने में कामयाब हो गए। जिस तरह चुनाव से पहले दलित को चीफ़ मिनिस्टर बनाने की बात कही गई थी शायद इसी तरह मुस्लमानों को भी 12 फ़ीसद तहफ़्फुज़ात का वाअदा किया गया था।

चीफ़ मिनिस्टर ने ये कहा कि वो सिद्धार कमेटी की रिपोर्ट मौसूल होते ही असेंबली में मुस्लमानों के लिए तहफ़्फुज़ात के मस्ले को मंज़ूर करने के बाद मर्कज़ से रुजू करेंगे जहां नरेंद्र मोदी वज़ीर-ए-आज़म मौजूद हैं और उनके ताल्लुक़ से मुस्लमान तो सब वाक़िफ़ हैं। अफ़सोस तो इस बात का हैके आज अप्पोज़ीशन की ग़ैरमौजूदगी में ये बात कही गई।

मुस्लमानों की नुमाइंदा और इस की अक्कासी करने वाली पार्टी और पार्टी के क़ाइदीन ने भी चीफ़ मिनिस्टर को 12 फ़ीसद तहफ़्फुज़ात की तरफ़ तवज्जा दिलाई और ना ही चीफ़ मिनिस्टर के इस बयान पर कि हम मरकज़ से रुजू होंगे, किसी किस्म का कोई उज़्र दर्ज करवाया। इस बात को नहीं भूलना चाहीए कि पड़ोसी रियासत महाराष्ट्रा में मराठों को तहफ़्फुज़ात दिए गए थे इस पर भी रोक लगादी गई है।

जहां तक मर्कज़ी हुकूमत को असेंबली की मनज़ोरा क़रारदाद रवाना करने का मुआमला है साल 2007 से ही दस्तूर के शेडूल 9जिसके तहत तहफ़्फुज़ात फ़राहम किए जाते हैं या तहफ़्फुज़ात की पालिसी में तरमीम की जा सकती है उसे भी सुप्रीमकोर्ट ने दुबारा जायज़ा लेने के अहकामात दिए हैं।

रोज़नामा सियासत की एक माह से चलाई जाने वाली तहरीक में मुस्लमानों को तहफ़्फुज़ात के लिए बी सी कमीशन के ज़रीये तहफ़्फुज़ात फ़राहम करने का मुतालिबा किया जा रहा है। इस लिए कि दस्तूर के मुताबिक़ किसी भी तबक़ा को पसमांदा तबक़ा में दर्ज करने या फिर उस का ज़मुरा मुक़र्रर करने पसमांदा तबक़ात में शमूलीयत हो या फिर इख़राज हो उस का मजाज़ सिर्फ बी सी कमीशन को हासिल है।

चीफ़ मिनिस्टर के बयान के बाद दफ़्तर सियासत में ज़ाहिद अली ख़ां की सदारत में एक मीटिंग मुनाक़िद हुवी जिसमें ये तए किया गया कि एडीटर सियासत ज़ाहिद अली ख़ां की दस्तख़त से एक मकतूब चीफ़ मिनिस्टर तेलंगाना के चन्द्रशेखर राव‌ के नाम रवाना किया जाएगा जिसमें उन्हें तवज्जा दिलाई जाएगी कि पसमांदा तबक़ात कमीशन के ज़रीये दिए जानेवाले तहफ़्फुज़ात किस तरह मुम्किन और महफ़ूज़ रहेंगे और इस से इस के मक़सद मैं किस तरह कामयाबी हासिल होगी, और मर्कज़ से रुजू होने के बाद चीफ़ मिनिस्टर के फ़ैस्ले मैं किस किस्म की परेशानी और टाल मटोल हो सकती है।

सियासत के ज़िम्मेदारों ने इस मीटिंग में जो हंगामी हालात पर तलब किया गया और इस में फ़ौरी चीफ़ मिनिस्टर की तवज्जा दहानी का फ़ैस्ला किया गया और इस बात पर गहिरी फ़िक्र का इज़हार किया गया कि अगर तहफ़्फुज़ात की फ़राहमी में ताख़ीर और टाल मटोल होती है तो इस का रास्त असर 15,522 सरकारी जायदादों पर होगा बल्कि सीधे उन जायदादों से मुस्लमानों को महरूमी होगी। जबकि तालीमी मैदान में एसे कई मौक़ों से नौजवान मुस्लिम नसल महरूम हो जाएगीगी।

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