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ट्रिपल तलाक धार्मिक नहीं लैंगिक मामला है: वेंकैया नायडू

नई दिल्ली: सूचना एवं प्रसारण मंत्री एम वेंकैया नायडू ने कहा है कि समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पीछे के दरवाजे से या आम सहमति के बगैर नहीं लाया जाएगा। उन्होंने इस बात को खारिज किया कि भाजपा यूसीसी के नाम पर यूपी चुनाव का ध्रुवीकरण कर रही है। उन्होंने कहा कि ट्रिपल तलाक, नागरिक संहिता और राम मंदिर जैसे मुद्दों पर भाजपा कोई राजनीति नहीं कर रही है। आगामी चुनाव विकास के एजेंडे पर लड़ा जाएगा।

नायडू ने कहा कि इन मुद्दों को राजनीति के चश्में से नहीं देखा जाना चाहिए। सरकार इसको (ट्रिपल तलाक) धार्मिक विषय के रूप में नहीं देखती। यह एक लैंगिक संवेदनशीलता का मामला है। यह कहना है कि हम मुस्लिम मुद्दों में हस्तक्षेप कर रहे हैं, यह गलत है।

वेंकैया नायडू ने पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि हिंदू कोड बिल, तलाक अधिनियम, हिंदू विवाह अधिनियम पर प्रतिबंध, दहेज और सती प्रथा उन्मूलन कानून भारतीय संसद के तरफ से लाया गया था। यह सब कुछ एक ही संसदीय व्यवस्था और एक ही राजनीतिक व्यवस्था में किया गया। उन्होंने कहा समान नागरिक संहिता पर व्यापक सहमति बनाने की जरूरत है। यह आरोप सही नहीं है कि ट्रिपल तलाक और यूसीसी पिछले दरवाजे से लाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि हम समान नागरिक संहिता के बारे में चर्चा नहीं कर रहे हैं। विधि आयोग ने एक प्रश्नावली जारी किया है और लोगों से उस प्रतिक्रिया देने को कहा है। बिना आम सहमति के यूसीसी को नहीं लाया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट से आशा है कि वो ट्रिपल तलाक के मुद्दे पर सही निर्णय लेगी।

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