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ट्वीटर यूज़र्स ने जताई हैरानी, अपने संबोधन में ‘मित्रों’ कहना कैसे भूले पीएम

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को 51 दिनों में दूसरी बार राष्ट्र को संबोधित किया। हालांकि जैसी संभावनाएँ जताई जा रहीं थी उन सब के बिलकुल उलट अपने संबोधन में पीएम ने नोटबंदी कदम के प्रतिकूल प्रभाव और उनसे निपटने के लिए अपने भविष्य की योजनाओं के बारे में कुछ नहीं कहा |

पांच चुनावी राज्यों में संभावित मतदाताओं को लुभाने के लिए उन्होंने अपने संबोधन में होम लोन और किसानों को दिए जाने वाले ब्याज दर में छूट की घोषणा की | उन्होंने ये भी एलान किया कि सरकार गर्भवती महिलाओं के लिए नई योजना के तहत, गर्भवती महिलाओं के पंजीकरण, डिलीवरी और टीकाकरण के लिए छह हजार रुपये देगी|

हालांकि, ट्विटर यूज़र्स के मुताबिक़ पता चला है कि प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में ‘मित्रों ‘ शब्द का इस्तेमाल नहीं किया था| आज के अपने संबोधन में उन्होंने जनता को  को संबोधित करने के लिए देशवासियों का इस्तेमाल किया|

8 नवंबर को राष्ट्र के नाम अपने पहले संबोधन के दौरान उन्होंने ‘मित्रों’ का इस्तेमाल किया था जिसकी वजह से उनका बहुत मज़ाक उड़ाया गया था | एक अर्बन डिक्शनरी के मुताबिक़ मित्रों के शब्द का इस्तेमाल एक अनजान समूह के लिए किया जाता है जिसको कुछ ऐसा सुनने को मिलने वाला है जिससे उबरने में उसे बहुत लंबा वक़्त मिलेगा |लोगों के समूह के लिए बुरी खबर को सुनाने में इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द है |अपने संबोधन में सिर्फ़ एक बार बैंक कर्मचारियों के लिए इस्तेमाल किया | पीएम के संबोधन पर ट्वीटर यूज़र्स ने कुछ रिएक्शन

 

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