Sunday , October 22 2017
Home / Bihar News / डॉक्टरों की बराह ए रास्त मुस्तकिल तकर्रुरी

डॉक्टरों की बराह ए रास्त मुस्तकिल तकर्रुरी

सूबे में डॉक्टरों की अब मुस्तकिल तकर्रुरी होगी। एमबीबीएस के बाद ही बिहार लोक सेवा आयोग के जरिये तकर्रुरी हो सकेगी। इसके लिए तहरीरी इम्तेहान नहीं देनी होगी। सिर्फ इंटरव्यू देना होगा। देही इलाक़े में सर्विस की शर्त को भी खत्म कर दि

सूबे में डॉक्टरों की अब मुस्तकिल तकर्रुरी होगी। एमबीबीएस के बाद ही बिहार लोक सेवा आयोग के जरिये तकर्रुरी हो सकेगी। इसके लिए तहरीरी इम्तेहान नहीं देनी होगी। सिर्फ इंटरव्यू देना होगा। देही इलाक़े में सर्विस की शर्त को भी खत्म कर दिया गया है। मुआहदे पर तकर्रुरी और कम सहूलतों की वजह डॉक्टरों की सरकारी खिदमत के तरफ से कम रुझानात को देखते हुए हुकूमत ने तकर्रुरी अमल को आसान कर दिया है। सेहत की खिदमत दस्तूरुल अमल 1984 और 2008 में तब्दील किया गया है। दस्तूरुल अमल बन गयी है। अब कैबिनेट से इसकी मंजूरी ली जायेगी।

फिलहाल क्या है सुरते हाल

बिहार में काम करदा डॉक्टर सहूलतों के मामले में दूसरे रियासतों से पीछे हैं। उन्हें न तो नॉन प्रैक्टिसिंग एलाउंस (एनपीए) मिलता है और न ही देही खिदमत एलाउंस। दो स्लैब में उनका तंख्वाह मुकर्रर है। मुस्तकिल तकर्रुरी में कई बाधाएं हैं, जबकि रियासतों में ऐसा नहीं है। नतीजा है कि सरकारी अस्पतालों में मंजूर ओहदे के खिलाफ आधे से जायदा ओहदा खाली हैं।

दीगर रियासतों में बेहतर सहूलतें
गुजरात में हर सप्ताह डॉक्टरों की तकर्रुरी होती है। तीन सालों की खिदमत के बाद नौकरी मुस्तकिल कर दी जाती है। रिहाईस, पानी, बिजली और बच्चों की तालीम के लिए गुजरात में बिहार से बेहतर इंतेजामात है।

हरियाणा और दिल्ली जैसे रियासत अपने डॉक्टरों को एनपीए का फाइदा देते हैं। इससे उनके तंख्वाह में 20-25 फीसद का फायदा मिलता है। पंजाब, कश्मीर और उत्तराखंड सरकार देही इलाक़े में काम करनेवाले अपने डॉक्टरों को देही खिदमत एलाउंस देती है। इससे भी उनके तंख्वाह में 20-25 फीसद का फायदा मिलता है।

TOPPOPULARRECENT