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डॉक्टर ही नहीं लिखते जेनरिक दवा

रांची 10 जून : रियासत भर के सदर अस्पतालों में बड़े पैमाने पर मुन्शियात की मर्क़ज खोले गये हैं, जहां मरीजों को सस्ती जेनेरिक दवाएं फराहम करायी जाती हैं। ये दवाएं ब्रांडेड दवाओं से 10 गुनी तक सस्ती हैं। इधर, कई अस्पतालों में दवा की कमी ह

रांची 10 जून : रियासत भर के सदर अस्पतालों में बड़े पैमाने पर मुन्शियात की मर्क़ज खोले गये हैं, जहां मरीजों को सस्ती जेनेरिक दवाएं फराहम करायी जाती हैं। ये दवाएं ब्रांडेड दवाओं से 10 गुनी तक सस्ती हैं। इधर, कई अस्पतालों में दवा की कमी है या फिर डॉक्टर जेनेरिक दवा लिख ही नहीं रहे हैं। महकमा के अफसरों के मुताबिक यह सब देखना और इस बात का यकीन करना सिविल सजर्न की जिम्मेवारी है।

झारखंड में बेब पैमाने पर ड्रग (जेनेरिक दवा) की फरहमी का काम सुपर स्टॉकिस्ट यूनिक फार्मा को मिला है। यूनिक फार्मा के एके तिवारी का कहना है कि उन्हें दवाओं का पेमेंट वक़्त पर नहीं मिल रहा है।
सदर अस्पतालों में वाक़ेय अवामी ड्रग सेंटर से एक बार में 10-12 हजार रुपये की दवाओं का ऑर्डर मिलता है। सस्ती होने की वजह जेनेरिक दवाओं में कमीशन कम है। ऐसे में समय पर पेमेंट नहीं होने से वह अगली खेप की फराहमी करने की काबिल नहीं हैं।

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