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डोरंडा में जलसा-ए-सिरतुन्नबी में ओलमा की शिरकत

गुजिशता रोज़ बाद नमाज़ ईशा दर्जी मुहल्ला डोरन्दा में नौजवान अहले सुन्नत के ज़ेरे एहतेमाम ओलमा व मौलाना सैयद शाह सैफुद्दीन असदकी की सरपरस्ती और हाफ़िज़ व कारी जावेद अहमद रिजवी की सदारत में जलसा सिरतुन्नबी का एंकाद किया गया। जिसमें सै

गुजिशता रोज़ बाद नमाज़ ईशा दर्जी मुहल्ला डोरन्दा में नौजवान अहले सुन्नत के ज़ेरे एहतेमाम ओलमा व मौलाना सैयद शाह सैफुद्दीन असदकी की सरपरस्ती और हाफ़िज़ व कारी जावेद अहमद रिजवी की सदारत में जलसा सिरतुन्नबी का एंकाद किया गया। जिसमें सैकड़ों ओलमाए किराम व हजारों मुसलमानों ने शिरकत की चूंकि 18 मई के मुल्तवी शुदा मुनाज़िरा का मौजू था के ओलमए देवबंदी अपनी किताबों की रोशनी में अपना ईमान साबित करें इस लिए अक्सर मुक़र्ररीन ने इसी मौजू पर गुफ्तगू की। मजमा से खिताब करते हुये मेहमान खुसुसि मौलाना मुफ़्ती अब्दुल मन्नान कालीमि मुरादाबादी ने कहा की अल्लाह रबूल्ल इज्ज़त ने रसूल को पूरी कायनात की ताज़ीम व तौकीर का हुक्म दिया। लिहाजा हुज़ूर की रिसालत व नाबूवत पर ईमान लाना फर्ज़ है। उन्होने कहा की रसूल की शान में गुस्ताखी करने वाला मुसलमान नहीं हो सकता। मुफ़्ती साहब ने कहा की देवबंदी व गैर मुकल्दा एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।

तकरीब से खिताब करते हुये गुजरात से तशरीफ लाये ओलमा मौलाना मुफ़्ती अब्दुल सत्तार हमदानी ने कहा की अल्लाह ताला ने रसूल की अजमत व बुलंदी की क़िसम खाई और नबी को इतना चाहा की जब नबी की तबीयत ने खाना काबा को क़िबला बनाने की चाहा तो नबी के चाहने से अल्लाह रबूल्ल इज्ज़त ने खाना काबा को क़िबला बना दिया। अल्लामा सैफुद्दीन असदकी ने सहाबा की सिरत पर रोशनी डालते हुये ख़ुसूसन नौजवानों को इस रोशनी में अपनी ज़िंदगी गुजारने की तलकीन की।

इजलास में कारी अय्युब, मौलाना कुतूबुद्दीन रिजवी, मौलाना तजुद्दीन, मुफ़्ती अब्दुल मालिक, करी जान मोहम्मद, मौलाना कमरुद्दीन रिजवी, मुफ़्ती एजाज हुसैन वगैरह मौजूद थे।

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