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ढाका कत्लेआम पर इरफान का दर्द, मुसलमान चुप क्यों?

नई दिल्ली : रमजान के महीने में कुर्बानी के खिलाफ बोलकर खबरों में आए अभिनेता इरफान ने एक बार फिर मजहब के नाम पर हो रही हिंसा पर सवाल उठाया है। कुछ दिन पहले इस्लाम में कुर्बानी की प्रथा की अपनी व्याख्या करने के बाद विवादों में आए इरफान ने इस बार इस्लाम के नाम पर हो रही हिंसा का विरोध किया है। आतंकियों ने ढाका के एक रेस्तरां पर हमला कर 20 लोगों की जान ले ली थी। इरफान ने सोशल मीडिया पर धमाके के पीडि़तों के लिए संवेदना जाहिर की और ऐसी हरकत करने वाले आतंकियों को निशाने पर लेते हुए इस्लाम का नाम खराब करने की आलोचना की। इरफान ने मुस्लिम समुदाय की चुप्पी पर सवाल भी उठाए।

उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, ‘बचपन में मजहब के बारे में कहा गया था कि आपका पड़ोसी भूखा हो तो आपको उसको शामिल किए बिना अकेले खाना नहीं खाना चाहिए। बांग्लादेश की खबर सुनकर अंदर अजीब वहशत का सन्नाटा है। कुरान की आयतें न जानने की वजह से रमजान के महीने में लोगों कत्ल कर दिया गया। हादसा एक जगह होता है, बदनाम इस्लाम और पूरी दुनिया का मुसलमान होता है। वह इस्लाम जिसकी बुनियाद ही अमन, रहम और दूसरों का दर्द महसूस करना है। ऐसे में क्या मुसलमान चुप बैठा रहे और मजहब को बदनाम होने दे? या वो खुद इस्लाम के सही मायने को समझे और दूसरों को बताए कि जुल्म और कत्लोगहरात करना इस्लाम नहीं है। यह एक सवाल है।’ इरफान की पोस्ट को अभी तक लगभग 4 हजार लोग शेयर कर चुके हैं। इस पोस्ट को कई प्रमुख हस्तियों ने भी प्रतिक्रिया देते हुए अपनी वॉल पर रीपोस्ट किया है।

इरफान के इस पोस्ट पर बहुत से लोगों ने यह सवाल उठाया कि जब म्यांमार और इस्रायल में मुसलमानों पर जुल्म होता है, तो सभी बौद्धयों और यहूदियों को आतंकी क्यों नहीं कहा जाता? पत्रकार वसीम अकरम त्यागी ने लिखा, मुसलमान एक अजीब कशमकश से गुजर रहा है। वह चरमपंथी घटनाओं का सबसे ज्यादा शिकार है। सबसे ज्यादा जानें भी मुसलामानों की गई हैं… और आतंकी होने का ठप्पा भी मुसलमानों पर लगा दिया गया है। जब कहीं हमला होता है, तो सबसे पहले पूरी दुनिया मुसलमानों की तरफ देखती है कि वे आगे आकर इसकी निंदा करे। आतंकवाद से इस्लाम का कोई रिश्ता नहीं है, ऐसे बयान दें।’ उन्होंने लिखा, दो चार दिन पहले इस्तांबुल में 44 लोग मारे गए, कल इराक में काफी लोग मारे गए, मगर क्या वजह है कि चर्चा सिर्फ बांग्लादेश को लेकर होता है, चर्चा ब्रसेल्स, फ्रांस को लेकर होती है, क्या फलस्तीन को लेकर किसी अभिनेता ने सवाल किया कि यहूदी चुप क्यों हैं?

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