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तकरीबन एक हज़ार ख़वातीन का ख़ानदानी ग़ैरत के नाम पर क़तल

पाकिस्तान में इंसानी हुक़ूक़ का दिफ़ा करनेवाली एक सफ़े अव्वल की ग़ैर सरकारी तंज़ीम ने अपनी सालाना रिपोर्ट में कहा है कि 2011-के दौरान ख़ानदानी इज़्ज़त-ओ-नामूस के नाम पर मुल्क में कम अज़ कम 943 ख़वातीन को क़तल किया गया, जबकि 701 ने ख़ुदकु

पाकिस्तान में इंसानी हुक़ूक़ का दिफ़ा करनेवाली एक सफ़े अव्वल की ग़ैर सरकारी तंज़ीम ने अपनी सालाना रिपोर्ट में कहा है कि 2011-के दौरान ख़ानदानी इज़्ज़त-ओ-नामूस के नाम पर मुल्क में कम अज़ कम 943 ख़वातीन को क़तल किया गया, जबकि 701 ने ख़ुदकुशी करके मौत को गले लगाया जो इस रुजहान में इज़ाफे़ को ज़ाहिर करता है।

हियूमन राईट्स कमीशन आफ़ पाकिस्तान (ऐच आर सी पी) ने जुमेरात को ईस्लामाबाद में ये रिपोर्ट जारी करते हुए मुल्क में इंसानी हुक़ूक़ के हवाले से उमूमी और बिलख़सूस बलोचिस्तान, कराची और ख़ैबर पुख़्तून ख़ाह की सूरत-ए-हाल को तशवीशनाक क़रार देते हुए कहा है कि हुकूमत की जानिब से बेहतरी के लिए कोई नुमायां कोशिशें नहीं की गईं।

अचानक तशद्दुद भड़क उठने के वाक़ियात के नतीजे में कराची में साल के दौरान 1,715 अफ़राद अपनी जानों से हाथ धो बैठे। 173 अफ़राद को बलोचिस्तान में अग़वा करने के बाद हलाक किया गया। मावराए अदालत हलाकतों में 517 वो अफ़राद शामिल थे जो ड्रोन तय्यारों के हमले के नतीजे में मारे गए।पाकिस्तान में गुज़श्ता साल के दौरान दहश्तगर्दी की कार्यवाईयों बिशमोल ख़ुदकुश और फ़िर्कावाराना हमलों में हलाकतों की तादाद 2,307 बताई गई है।

ऐच आर सी पी ने अपनी रिपोर्ट में 2011-के दौरान जबरी गुमशुदगी के 62 नए वाक़ियात की तसदीक़ करते हुए कहा है कि इन में 35 अफ़राद को बलोचिस्तान और 20 को सिंध से ग़ायब किया गया।

शहरीयों के ग़ायब करने के मुक़द्दमात की समाअत (अदालत अज़माई में) साल भर जारी रही लेकिन कोई पेशरफ़्त देखने में नहीं आई। तंज़ीम के शरीक चेयरपर्सन कामरान आरिफ़ ने ख़वातीन में ख़ुदकुशियों के रुजहान में इज़ाफे़ पर तशवीश का इज़हार किया।

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