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तनख़्वाहों की अदायगी के लिए मुलाज़मीन लेबर कोर्ट से रुजू

किंगफिशर एयरलाईंस के बोहरान की आजलाना यकसूई होती नज़र नहीं आती क्योंकि एयरलाईंस के स्टाफ़ बिशमोल पायलेट्स‍ और इनजीनीयर्स ने शिकायत की है कि इंतिज़ामीया की यक़ीन दहानी के बावजूद तनख़्वाहों की अदायगी हनूज़ नहीं हुई है लिहाज़ा अब माय

किंगफिशर एयरलाईंस के बोहरान की आजलाना यकसूई होती नज़र नहीं आती क्योंकि एयरलाईंस के स्टाफ़ बिशमोल पायलेट्स‍ और इनजीनीयर्स ने शिकायत की है कि इंतिज़ामीया की यक़ीन दहानी के बावजूद तनख़्वाहों की अदायगी हनूज़ नहीं हुई है लिहाज़ा अब मायूस स्टाफ़ के पास सिवाए इसके कोई और मुतबादिल नहीं है कि वो इस तनाज़ा की यकसूई के लिए लेबर कोर्ट से रुजू हों।

दरीं असना एयरलाईम्स के बाअज़ स्टाफ़ ने शनाख़्त मख्फ़ी रखे जाने की शर्त पर बताया कि अप्रैल का महीना ख़तम हुआ और इस तरह एयरलाईंस एक बार फिर वर्कर्स को चार माह की तनख़्वाहें वाजिब अलादा है (जनवरी से अप्रैल)। अफ़सोस इस बात पर होता है कि एयरलाईंस इंतेज़ामीया ने अब तक ये वाज़िह ही नहीं किया है कि आख़िर तनख़्वाहें कब दी जाने वाली हैं।

लिहाज़ा सूरत-ए-हाल अब दुबारा पहले जैसी हो गई है। दूसरी तरफ़ पायलेट्स अब लेबर अदालत से रुजू होने की तैयारी कर रहे हैं ताकि जितने भी मुलाज़मीन की तनख़्वाहें रुकी हुई हैं, उनकी फ़ौरी अदायगी हो सके। एयरलाईंस स्टाफ़ जल्द ही मुस्तक़बिल का लायेहा-ए-अमल तैयार करने एक मुशतर्का फ़ैसला करेगा।

गुज़श्ता माह भी एयरलाईंस स्टाफ़ ने किंगफिशर इंतिज़ामीया को तनख़्वाहों की अदायगी के लिए 20 अप्रैल तक की मोहलत दी थी जिस के बाद उन्होंने हड़ताल की धमकी दी थी। यहां इस बात का तज़किरा भी ज़रूरी है कि किंगफिशर एयरलाईंस ने अपनी बैरूनी ममालिक परवाज़ों को मुकम्मल तौर पर मस्दूद कर दिया है जबकि डोमेस्टिक फ्लाइट्स का भी बुरा हाल है और सिर्फ मख़सूस सेक्टर्स में परवाज़ चलाई जा रही हैं।

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