Monday , September 25 2017
Home / India / तबदीली मज़हब के बगैर हिंदू और ईसाई जोड़े की शादी नाजायज़

तबदीली मज़हब के बगैर हिंदू और ईसाई जोड़े की शादी नाजायज़

मदवाई: हिंदू ख़ातून और ईसाई मर्द के दरमियान शादी क़ानूनी तौर पर जायज़ क़रार नहीं दी जा सकती बशर्ते कि दोनों किसी एक का मज़हब क़बूल ना करले। मद्रास हाईकोर्ट ने ये नुक़्ता-ए-नज़र पेश किया है। ख़ातून के वालदैन की दरख़ास्त रिहाई हब्स बेजा को मुस्तरद करते हुए जस्टिस पी आर शिवा कुमार और वी एस रवी ने कहा कि अगर ये जोड़ा हिंदू रस्म-ओ-रिवाज के मुताबिक़ शादी करना चाहता है तो मर्द को चाहिए कि वो हिंदू धरम में शामिल हो जाए य फिर ईसाई तौर तरीके के मुताबिक़ ख़ातून शादी करना चाहती है तो वो ईसाईयत में दाख़िल हो जाएगी।

अदालत ने मुतबादिल के तौर पर ये मश्वरा दिया कि अगर ये जोड़ा तबदीली मज़हब के बगैर अपने अपने मज़हब पर क़ायम रहना चाहता है तो स्पेशल मैरेज एक्ट 1954 के तहत रजिस्ट्रेशन के बाद शादी अंजाम दे सकता है। वालदैन की दरख़ास्त हब्स बेजा से रिहाई दाख़िल करने के बाद पुलिस ने आज ख़ातून को अदालत में पेश किया और जजों को मतला किया कि इस ख़ातून ने पिलानी की एक मंदिर में शादी करली है जिस पर उन्होंने दरयाफ़त किया कि हिंदू क़ानून के मुताबिक़ ये शादी किस तरह जायज़ हो सकती है अगर मर्द ने हिंदू धरम क़बूल नहीं किया है।

ख़ातून अपने नौ ब्याही शौहर के साथ जाने के फैसले पर मिस्र रही। उस के बालिग़ होने की वजह से ये इजाज़त देदी गई। हाईकोर्ट बेंच ने कहा कि अगर कि बालिग़ होने के नाते ये ख़ातून अपनी पसंद की ज़िंदगी गुज़ार सकती है लेकिन हिंदू क़ानून के मुताबिक़ उनकी शादी जायज़ क़रार नहीं दी जा सकती।

TOPPOPULARRECENT