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तमाम फ़र्ज़ी एनकाउंटर्स की तहकीकात सुप्रीम कोर्ट की हुकूमतों को नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने आज एक दरख़ास्त पर मर्कज़ी और तमाम रियासती हुकूमतों से मौक़िफ़ वाज़िह करने को कहा है । इस दरख़ास्त में इस्तेदा की गई है कि गुज़शता 10 साल के दौरान सारे मुल्क में जो मुबय्यना तौर पर फ़र्ज़ी एनकाउंटर्स हुए हैं उन की आज़ादाना त

सुप्रीम कोर्ट ने आज एक दरख़ास्त पर मर्कज़ी और तमाम रियासती हुकूमतों से मौक़िफ़ वाज़िह करने को कहा है । इस दरख़ास्त में इस्तेदा की गई है कि गुज़शता 10 साल के दौरान सारे मुल्क में जो मुबय्यना तौर पर फ़र्ज़ी एनकाउंटर्स हुए हैं उन की आज़ादाना तहकीकात करवाई जाएं।

जस्टिस आफ़ताब आलम और जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई पर मुश्तमिल एक बंच ने मर्कज़ी और तमाम रियासती हुकूमतों से अपने जवाब दाख़िल करने को कहा है और उन्हें नोटिसें जारी कर दी हैं। ये कार्रवाई हुकूमत गुजरात की एक दरख़ास्त पर की गई है जिस में हुकूमत ने कहा है कि तमाम फ़र्ज़ी एनकाउंटर के वाक़्यात से यकसाँ अंदाज़ में निमटने के लिए हिदायत दी जाए ।

हुकूमत गुजरात ने इल्ज़ाम आइद किया है कि कुछ मुफ़ादात हासिला की जानिब से एनकाउंटर हलाकतों के मसला पर पुलिस को निशाना बनाते हुए इसके हौसले पस्त किए जा रहे हैं। दरख़ास्त में कहा गया है कि हुकूमत गुजरात चाहती है कि अदालत की जानिब से एक मुनासिब हिदायत जारी की जाए कि मुल्क में पेश आए तमाम मुबय्यना फ़र्ज़ी एनकाउंटर्स के वाक़्यात की यकसाँ अंदाज़ में जांच की जाए जिसके नतीजा में हक़ूक़-ए-इंसानी का तहफ़्फ़ुज़ मुम्किन हो सकता है ।

हुकूमत ने कहा कि कुछ मुफ़ादात हा सिला की जानिब से गुजरात पुलिस को मुसलसल निशाना बनाया जा रहा है ताकि इसके हौसले पस्त किए जा सकें। अगर सुप्रीम कोर्ट की जानिब से मुल़्क की तमाम रियासतों में एनकाउंटर्स से यकसाँ अंदाज़ में निमटने की हिदायत दी जाती है तो इस से दहश्तगर्दी का शिकार रियासत गुजरात की पुलिस के हौसले पस्त होने से बचाया जा सकेगा।

इस दरख़ास्त में तमाम रियासती हुकूमतों और मर्कज़ी ज़ेर इंतेज़ाम इलाक़ों को ये हिदायत देने की इस्तेदा की गई है कि मुल्क भर में गुज़शता दस साल के दौरान पेश आए मुबय्यना फ़र्ज़ी एनकाउंटर्स की तहकीकात के लिए एक मुल्क गैर पॉलीसी तैयार की जाए और एक आज़ादाना तहक़ीक़ाती एजंसी क़ायम करते हुए उस की तहकीकात करवाई जाएं जैसा कि गुजरात में एक नगर इनकार अथॉरीटी और ख़ुसूसी टास्क फ़ोर्स तशकील दी गई है ।

हुकूमत गुजरात की अर्ज़ी में कहा गया है कि इस तरह का इक़दाम इस लिए भी ज़रूरी है कि इस के नतीजा में जहां एक तरफ़ एनकाउंटर के नाम पर गैरकानूनी हलाकतों का सिलसिला भी रुक जाएगा और दूसरी जानिब उसे दयानतदार पुलिस ओहदेदारों के हौसले भी पस्त नहीं होने पाएंगे जो दहश्तगर्द तनज़ीमों मुनज़्ज़म जराइम का इर्तेकाब करने वालों वगैरह से निमटने में मसरूफ़ हैं।

इन सरगर्मियों में शरीक ओहदेदारों को हमेशा ख़तरात लाहक़ होते हैं और अक्सर-ओ-बेशतर उन पर इल्ज़ामात भी आइद होते हैं। दरख़ास्त में कहा गया है कि निगरान कार अथॉरीटी को ये हिदायत भी दी जानी चाहीए कि वो अपनी तहक़ीक़ाती रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट ही को पेश करे ।

अपनी दरख़ास्त में हुकूमत गुजरात ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को सारे मुल् के हक़ीक़ी मंज़र नामा का जायज़ा लेने की भी ज़रूरत है ताकि एक मख़सूस रियासत के साथ रवा रखे जाने वाले मुख़्तलिफ़ तर्ज़ अमल को ख़तम किया जा सके जहां फ़र्ज़ी एनकाउंटर्स के वाक़्यात कम से कम होते हैं।

हुकूमत ने मुल्क में दहश्तगर्दी से मुतास्सिरा रियासतों का तफ़सीली डाटा भी पेश किया है और कहा कि दहश्तगर्दी के नतीजा में पहले ही 72,000 जानें तलफ़ हो गई हैं और 12,000 सिक्योरीटी अहलकार भी इसका शिकार हो चुके हैं। गुजरात में 2002 से 2006 के बीच में हुए फ़र्ज़ी एनकाउंटर्स से मुताल्लिक़ दरख़ास्तों की समाअत कर रही बंच ने रियासती हुकूमत को ये इजाज़त दी कि वो इस मसला पर अदालत में एक अलैहदा दरख़ास्त भी पेश करे ।

हुकूमत की अर्ज़ी में शिकायत की गई थी कि एनकाउंटर हलाकतों पर सिर्फ नरेंद्र मोदी हुकूमत को निशाना बनाया जा रहा है । सुप्रीम कोर्ट की जानिब से पहले ही साबिक़ जज जस्टिस एच एस बेदी को गुजरात में 22 एनकाउंटर वाक़्यात की तहकीकात के लिए नगर इनकार अथॉरीटी का सदर नशीन बनाया जा चुका है ।

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