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तलबा की ज़िन्दगियों में रोशनी बिखेरना जारी रखें

बी जे पी के असातिज़ा सेल से मर्कज़ी वज़ीर फ़रोग़ इंसानी वसाइल की ख़ाहिश

बी जे पी के असातिज़ा सेल से मर्कज़ी वज़ीर फ़रोग़ इंसानी वसाइल की ख़ाहिश

मर्कज़ी वज़ीरे बराए फ़रोग़ असनानी वसाइल स्मृति ईरानी ने आज असातिज़ा से ख़ाहिश की कि वो तलबा की ज़िन्दगियों में रोशनी बिखेरना जारी रखें और उन्हें ख़ुद को बेहतर बनाने में मदद दें क्योंकि इंसान के अंदर का उस्ताद कभी सुबुक़‌दोश नहीं होता। उन्होंने वज़ीर-ए-आज़म नरेंद्र मोदी के बयान का हवाला देते हुए ईनाम-ए-याफ़्ता असातिज़ा से एक तक़रीब में ख़िताब करते हुए कहा कि तदरीस एक पेशा नहीं बल्कि तर्ज़-ए-ज़िदंगी है और उस्ताद कभी सुबुक़‌दोश नहीं होता।

बी जे पी के असातिज़ा शोबा की क़ौमी आमिला के इजलास से ख़िताब करते हुए स्मृति ईरानी ने असातिज़ा से इज़हार-ए-तशक्कुर किया कि उन्होंने तलबा की शख़्सियत को तरक़्क़ी देते हुए क़ौम की तामीर में हिस्सा लिया है। उन्होंने कहा कि असातिज़ा की ज़िन्दगियों में वसीअ तजुर्बा होता है।

उन्हें मुसलसल जद्द-ओ-जहद करना पड़ता है और तलबा को तालीम देना होता है। उन्होंने कहा कि उस्ताद वो शख़्सियत है जो अपने तलबा की ज़िन्दगियों में रोशनी बिखेरता है और आप को कई अफ़राद की ज़िन्दगियों में रोशनी बिखेरना जारी रखना चाहिए। उन्होंने असातिज़ा से समाज केलिए उनकी देन पर इज़हार-ए-तशक्कुर किया।

उन्होंने कहा कि तामर-ए-क़ौम में एक उस्ताद एक फ़र्द की शख़्सियत को तरक़्क़ी देते हुए अपना हिस्सा अदा करता है। वज़ीर-ए-आज़म का पैग़ाम उन तक पहुंचाते हुए मर्कज़ी वज़ीर ने कहा कि वज़ीर-ए-आज़म कह चुके हैं कि तदरीस एक पेशा नहीं बल्कि एक तर्ज़-ए-ज़िदंगी और उस्ताद कभी सुबुक़‌दोश नहीं होता बल्कि अवाम की ज़िन्दगियां बेहतर बनाने में उन की मदद करते हुए समाज केलिए अपना हिस्सा अदा करता है। शख़्सियत की तरक़्क़ी के साथ साथ क़ौमी की तामीर भी करता है।

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