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तलाक की दर अन्य के मुक़ाबिल मुस्लमानों में कम

जयपुर: ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के विभाग महिलाओं ने आज दावा किया कि मुसलमानों में तलाक की दर अन्य समुदायों की तुलना में कम है और यह कि तलाक समस्या को गलत रूप में पेश किया जा रहा है। देश भर में कुछ मुस्लिम बहुल जिलों परिवार न्यायालयों से प्राप्त डेटा का हवाला देते हुए विभाग के चीफ आयोजक अस्मा जोहरा ने कहा इस्लाम के तहत महिलाओं अच्छी तरह सुरक्षित हैं।

जो दर्शाता मुस्लिम महिलाओं से खुला अवर अनुपात से होती है। उनके ज्ञापन पृष्ठभूमि तीन तलाक पर जारी बहस हैं। यह मामला सुप्रीम कोर्ट में आभर है जो धार्मिक क्षमता कानूनी पहलुओं की समीक्षा करेगी। अस्मा जोहरा ने कहा परिवार कोर्ट से डेटा प्राप्त करने की प्रक्रिया पिछले साल मई में शुरू किया गया था जिसके तहत आरटीआई के जरिए डेटा हासिल‌ किए गए और 2011-15 के बाद से पांच साल की अवधि के आंकड़े प्राप्त किए गए।

16 परिवार न्यायालयों ने विस्तृत जुड़े रिपोर्ट दिए हैं। जोहरा ने यहां संवाददाता सम्मेलन को बताया कि इन आंकड़ों की रोशनी में यह निष्कर्ष निकाला गया है कि मुस्लिम समुदाय में तलाक की दर कम है। इसी तरह विभिन्न विवरण प्रस्तुत किए गए जिससे पता चला कि केवल दो ताकि तीन प्रतिशत मामले तलाक से जुड़े हैं जिनमें से ज्यादातर खुद महिलाओं के इशारे पर शुरू किए गए।

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