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तशद्दुद की कारी ज़रब , 2014 में 342बिलीयन डालर का नुक़्सान

नई दिल्ली: तशद्दुद ने हिन्दुस्तान को वहां ज़रब लगाई जहां सब से ज़्यादा तकलीफ़ पहुंचती है इस ने साल 2014 में मईशत पर 341.7 बिलीयन अमरीकी डॉलर तक की कारी ज़रब लगाई, इंस्टीटियूट फ़ार इक्नॉमिक्स ऐंड पीस (आई ई पी) ने ये बात कही है। इस मुल्क को रवां साल के आलमी अमन ईशारीया (जी पी आई) में 162 अक़्वाम के मिनजुमला कमतर 143 वां दर्जा मिला है।

आज शाय 2015 जी पी आई के मुताबिक़ बढ़ती शहरी बदअमनी और फिर नक़्ल-ए-मकानी से रौनुमा होने वाला बोहरान नुमायां अवामिल में से हैं जो आलमी तशद्दुद को रोकने के लिए बढ़ती लागत का सबब बन रहे हैं। हिन्दुस्तान के माम‌ले में इस रिपोर्ट ने कहा कि हिन्दुस्तान की सतह के तशद्दुद को रोकने, इस से निमटने और फिर माबाद असरात को ज़ाइल करने की कोशिशों के मआशी असर का 2014 में क़ौमी मईशत पर 341.7 बिलीयन डॉलर का तख़मीना लगाया गया है।

ये हिन्दुस्तान की मजमूई देसी पैदावार (जी डी पी) के 4.7 फ़ीसद हिस्सा या 273 डॉलर फ़ी शख़्स के मुमासिल होता है। दरीं असना जुनूबी एशिया 2014 में निचले दर्जे पर रहने के बाद इलाक़ाई दर्जा बंदी में एक मुक़ाम आगे बढ़ा है, लेकिन ये तबदीली ज़्यादा तर एम ई एन ए (मिडल ईस्ट ऐंड नॉर्थ अफ्रीका) में हालात ज़्यादा तेज़ी से बिगड़ जाने की वजह से हुआ है।

मजमूई तौर पर जुनूबी एशिया में ज़्यादा तर ममालिक का मुज़ाहरा घटा है, जबकि सिर्फ़ भूटान, नेपाल और बंगला देश ने बेहतरी दर्ज कराई है। हिन्दुस्तान जुनूबी एशिया में सात मुल्कों के मिनजुमला पांचवें रैंक पर है। जी पी आई को पहली बार मुतआरिफ़ कराने के बाद से गुज़िश्ता आठ साल में हिन्दुस्तान के हालात 6 फ़ीसद बिगड़े हैं।

उसकी वजह बड़ी हद तक ये है कि बैरूनी लड़ाई, सियासी दहशतगर्दी और इसी तरह के दीगर अवामिल के सबब होने वाली अम्वात का पता चलाने में अबतरी रही है। आलमी अमन ईशारीया में आइसलैंड सर-ए-फ़हरिस्त है, जिस के बाद डेनमार्क और ऑस्ट्रिया तरतीबवार दूसरी और तीसरी पोज़ीशन पर हैं।

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