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तहरीक तहफ़्फुज़ात सियासी नहीं, सियासत की सहाफ़ती ज़िम्मेदारी का हिस्सा

सिद्दिपेट 15 दिसंबर: न्यूज़ एडीटर रोज़नामा सियासत आमिर अली ख़ान ने हैदराबाद के बजाये अज़ला से 12 फ़ीसद मुस्लिम तहफ़्फुज़ात की तहरीक शुरू करने की वज़ाहत करते हुए कहा कि अगर मैं शहरे हैदराबाद से तहरीक का आग़ाज़ करता तो ये तसव्वुर किया जाता या बावर किया जाता के उनके कोई सियासी अज़ाइम हैं या मजलिस के ख़िलाफ़ सियासी महाज़ खोल रहे हैं या फिर रोज़नामा सियासत की तरफ से नई सियासी जमात तशकील देने की कोशिश की जा रही है जबके में वाज़िह कर देना मुनासिब समझता हूँ के मेरे कोई सियासी अज़ाइम नहीं हैं और ना ही रोज़नामा सियासत की तरफ से कोई सियासी जमात तशकील दी जा रही है।

जब एवानों में बैठने वालों ने मुसलमानों की ख़ुशहाली का ज़ामिन बनने वाले 12 फ़ीसद मुस्लिम तहफ़्फुज़ात के मसले को नज़रअंदाज कर दिया तो रोज़नामा सियासत ने अपनी सहाफ़ती ज़िम्मेदारी क़बूल करते हुए आगे बढ़ने का फ़ैसला किया है।आंध्र प्रदेश की तक़सीम और अलाहिदा तेलंगाना रियासत की तशकील के बाद मुख़्तलिफ़ मह्कमाजात में बड़े पैमाना पर तक़र्रुत होने वाले हैं।

टी आर एस हुकूमत ने एक लाख से ज़ाइद सरकारी जायदादों पर तक़र्रुत करने का एलान किया है और 15 हज़ार जायदादों पर तक़र्रुत के लिए आलामीया जारी कर दिया है। टी आर एस ने अपने चुनाव मंशूर में मुसलमानों को 12 फ़ीसद तहफ़्फुज़ात फ़राहम करने का वादा किया है। मुसलमानों से किए गए वादे पर अमल आवरी को यक़ीनी बनाने और चीफ़ मिनिस्टर तेलंगाना के सी आर पर जमहूरी अंदाज़ में दबाव‌ डालने के लिए अज़ला में ग्रुप मीटिंग्स, मुशावरती मीटिंग, जलसे और रैलियों के साथ भूक हड़ताल का एहतेमाम किया जा रहा है।

तहसीलदारों, कलेक्टरस और अवामी मुंतख़ब नुमाइंदों को तहरीरी तौर पर याददाश्तें पेश की जा रही हैं। 12 फ़ीसद मुस्लिम तहफ़्फुज़ात की तहरीक किसी जमात के ख़िलाफ़ नहीं है और ना ही किसी जमात की ताईद में है। सिर्फ और सिर्फ मुसलमानों को फ़ायदा पहुंचाने के लिए तमाम मुसलमानों को जमाती और मसलकी वाबस्तगी से बालातर हो कर एक प्लेटफार्म पर जमा किया जा रहा है जिसके मुसबित नताइज बरामद हो रहे हैं। अज़ला के मुसलमानों ने इस मुहिम को तहरीक में तबदील कर दिया है जिस के लिए वो तमाम मुसलमानों से इज़हारे-तशक्कुर करते हैं।

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