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ताड़ पन्नों पर नए सिरे से लिखा जा रहा जैन मज़हब ग्रंथ

रांची : श्वेतांबर जैन मज़हब के आगमों को ताड़ पन्ने पर नए सिरे से लिखा जा रहा है। यह काम श्वेतांबर के तपागच्छ तबके के आचार्य मिस्टर विजय कीर्ति यश सूरीश्वर जी महाराज की हिदायत में ओडि़शा में गुजिस्ता 20 सालों से चल रहा है। इसका 99 फीसद काम पूरा हो चुका है। अब हर्फ़ को एडिट किया जा रहा है।
इस काम का जिम्मा संभाल रहे सूरत के मनेश भाई ने एक अखबार को बताया कि दुनिया में पहली बार पुरानी नियम से ताड़ पन्नों पर जैन मज़हब की बातों को उकेरा जा रहा है। इसके लिए श्रीलंका के श्री पत्र और दक्षिण अफ्रीका व ओडि़शा के ताड़ पन्नों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसकी शुरुआत 1995-96 में हुई थी। इन ताड़ पन्नों को महफूज़ रखने के लिए बंकर बनाने की मंसूबा भी है। बताते चलें कि जैन मज़हब में उनके भगवान् की बातों को ही मज़हबी किताब कहा जाता है।

हर रियासत में बनेगा बंकर
ताड़ पन्ने पर लिखे इन मज़हबी किताबों को महफूज़ रखने के लिए मुल्क के तमाम रियासतों में एक-एक ज़मीन के अन्दर बंकर बनाने की मंजूबा है। शुरुआत में इसे सम्मत शिखर जी, नासिक के वणी गांव (सतपुड़ा) और हस्तगिरि, पालिताणा में बनाया जाएगा। इसका मॉडल तैयार हो चुका है। वणी में तो काम भी शुरू हो चुका है। अर्केटेक्ट और आर्ट से जुड़े मुशीर व इंजीनियरों की टीम तैयार है। एक बंकर पर करीब छह करोड़ रुपए खर्च होने का इमकान है। यह बंकर बम से महफूज़ व ज़मीन के अन्दर होगा।

 

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