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तालिबान के साथ मुज़ाकरात का नादिर मौक़ा ना गवाएं – जर्मनी

जर्मनी के वज़ीरे ख़ारजा ने अपने दौरा काबुल के दौरान कहा है कि अफ़्ग़ानिस्तान में पायदार अमन का वाहिद मुनासिब तरीक़ा तालिबान और हुकूमत के माबैन मुफ़ाहमत और मुज़ाकरात का है।

आज बरोज़ इतवार अफ़्ग़ान दारुल हकूमत काबुल पहुंचने के बाद जर्मन वज़ीरे ख़ारजा फ्रॉंक वाल्टर शटाइन मावर का अफ़्ग़ान हुकूमत पर ज़ोर देते हुए कहना था कि इस मुल्क में तवील जंग के ख़ातमे का एक ही मुनासिब तरीक़ा है और वो है तालिबान से मुफ़ाहमत का, अमन मुज़ाकरात के ज़रीए जो नादिर मौक़ा हाथ आया है, उसे गँवाया नहीं जाना चाहिए।

जर्मन वज़ीरे ख़ारजा का कहना था, हमारा मक़सद बहुत वाजेह है। अफ़्ग़ानिस्तान को अपने पांव पर खड़ा होना चाहिए। इस का ये मतलब भी है कि अफ़्ग़ानिस्तान को फ़ौरी तौर पर इस्लाहात का आग़ाज़ कर देना चाहिए।

जर्मन वज़ीरे ख़ारजा ने एक मर्तबा फिर काबुल हुकूमत को यक़ीन दिलाया है कि नौ माह पहले यूरोपीय यूनीयन के लड़ाका फ़ौजीयों की वापसी के बावजूद उनका मुल्क अफ़्ग़ानिस्तान की मदद जारी रखेगा।

याद रहे कि जर्मनी अफ़्ग़ानिस्तान को इमदाद फ़राहम करने वाली तीसरा बड़ा मुल्क है। सन दो हज़ार एक में तालिबान की हुकूमत के ख़ातमे के बाद से लेकर अब तक जर्मनी अफ़्ग़ानिस्तान को चार अरब यूरो से ज़ाइद (साढे़ चार अरब डॉलर) फ़राहम कर चुका है।

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