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इलम-ओ-हुनर से ही अक़्वाम की तरक़्क़ी मुम्किन:नज्म हेप्तुल्लाह

हैदराबाद 21 सितंबर: तालीम की एहमीयत-ओ-इफ़ादीयत का अंदाज़ा इस बात से किया जा सकता हैके तमाम मज़ाहिब में तालीम के हुसूल और तालीम के ज़रीये तरक़्क़ी का दरस दिया है।

मर्कज़ी हुकूमत मुल्क भर में तमाम तबक़ात की यकसाँ तरक़्क़ी के लिए इक़दामात कर रही है। वज़ीर-ए-आज़म नरेंद्र मोदी ने चौधवीं फाइनैंस कमीशन की सिफ़ारिशात के बाद कई महिकमों-ओ-वज़ारतों के बजट में तख़फ़ीफ़ की जबकि वज़ारत अक़लियती उमोर के बजट में तख़फ़ीफ़ के बजाय इज़ाफ़ा किया गया।

मर्कज़ी वज़ीर-ए-क़लीयाती उमोर नज्म हेप्तुल्लाह ने आज मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू यूनीवर्सिटी में मुनाक़िदा तालीम की ताक़त कांफ्रेंस से ख़िताब के दौरान इन ख़्यालात का इज़हार किया। उन्होंने दावा किया कि मर्कज़ी हुकूमत अक़लियतों की तरक़्क़ी के लिए मुतअद्दिद इक़दामात कर रही है और इंतेख़ाबात से क़बल किए गए तमाम वादों की तकमील को यक़ीनी बनाया जा रहा है।

तालीम की ताक़त के अनवान से मुनाक़िदा कांफ्रेंस में डिप्टी चीफ़ मिनिस्टर तेलंगाना मुहम्मद महमूद अली, जस्टिस एमवाय इक़बाल जज सुप्रीमकोर्ट, के कवीता रुकने पार्लियामेंट आबाद, किशवर ख़िरत एम डी-ओ-सी ई ओ आई डी बी आई बैंक, शम्सुद्दीन मुहम्मद चीफ़ इमाम मक्का मस्जिद चेन्नाई, ख़्वाजा शाहिद पिरो वाइस चांसलर मौलाना आज़ाद उर्दू यूनीवर्सिटी ने शिरकत की।

ज़फ़र सुरेश वाला चांसलर मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू यूनीवर्सिटी ने इस कांफ्रेंस की सदारत की। नज्म हेप्तुल्लाह ने कहा कि लड़कीयों और लड़कों के दरमयान तालीमी तफ़रीक़ के ख़ातमे को यक़ीनी बनाना वक़्त की अहम ज़रूरत है। उन्होंने बताया कि लड़कीयों की बेहतर तालीम के ज़रीये मुआशरे में तबदीली लाई जा सकती है।

उन्होंने कहा कि तालीम ख़ुद‍एतेमादी पैदा करती है और इलम-ओ-हुनर के ज़रीये ही अक़्वाम की तरक़्क़ी मुम्किन हो सकती है। नज्म हेप्तुल्लाह ने हिन्दुस्तान भर में मौजूद तालीमी इदारों के मयार को बेहतर बनाने की ज़रूरत पर-ज़ोर देते हुए कहा कि मुल्क भर में ज़ाइदाज़ 600 यूनीवर्सिटीयां और 35 हज़ार से ज़ाइद कॉलेजस मौजूद हैं लेकिन उन के मयार को बुलंद किया जाना नागुज़ीर है चूँकि आला तालीम के लिए बैरूनी मुल्क के तलबा इन यूनीवर्सिटीज़ का रुख कर सकें।

फ़िलहाल हम हिन्दुस्तानी तलबा आला तालीम के लिए बैरून-ए-मुल्क मयारी तालीमी इदारों का रख कर रहे हैं। उन्हों ने मौलाना अबुल-कलाम आज़ाद की ख़िदमात को ख़िराज-ए-अक़ीदत पेश करते हुए कहा कि मौलाना आज़ाद ने मलिक की तालीमी तरक़्क़ी और हिन्दोस्तान में मुस्तहकम तालीमी बुनियाद डालते हुए जो किरदार अदा किया है, वो नाक़ाबिल फ़रामोश है।

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