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तालीमी महारत से इंसान की ख़ुसूसी पहचान

अगर आप आला दर्जे की कामयाबी चाहते हैं तो अपने अंदर तब्दीली का आग़ाज़ फ़ौरन शुरू कर दें।अच्छी आदतों को हद दर्जा मुम्किन अपनाने की कोशिश करें और आप अपनी कमज़ोरों को दूर करके एक लायक़ शख़्सियत के हामिल बन सकते हैं। आला कामयाबी सिर्फ उन्ही

अगर आप आला दर्जे की कामयाबी चाहते हैं तो अपने अंदर तब्दीली का आग़ाज़ फ़ौरन शुरू कर दें।अच्छी आदतों को हद दर्जा मुम्किन अपनाने की कोशिश करें और आप अपनी कमज़ोरों को दूर करके एक लायक़ शख़्सियत के हामिल बन सकते हैं। आला कामयाबी सिर्फ उन्ही अफ़राद की जागीर बनती है जो मेहनती, मुस्तक़िल मिज़ाज, पुराज़म और काम के धनी होते हैं।

एक कामयाब तालिब-ए-इल्म की ये जुस्तजू होती है कि वो हमेशा कुछ नया सीखना चाहता है और इस तेज़ रफ़्तार दुनिया में भी अपने अल्लाह से ग़ाफ़िल नहीं होता। अल्लाह से ग़ाफ़िल होकर ना ही किसी ने हक़ीक़ी कामयाबी हासिल की है और ना ही करसकता है।

शैतान इंसान का खुला दुश्मन है वो हमेशा यही चाहता है कि अच्छाई की राह से ग़ाफ़िल करे और बुराई की राह पर गामज़न रखें। हाफ़िज़ा की मज़बूती के लिए कबीरा गुनाहों से बचा करें। इन ख़्यालात का इज़हार बिरादर मुहम्मद रफ़ी उद्दीन ने नोबल हाई स्कूल भैंसा में जमात दहम के तलबा के लिए मुनाक़िदा कैरीयर गाईडेंस प्रोग्राम किया।

जबकि बिरादर अबदुल हमीद करसपौंडेंट क्रीसेंट जूनियर कालेज आदिलाबाद ने तलबा-ए-से ख़िताब करते हुए कहा कि इल्म का हासिल करना हम पर जिस तरह से फ़र्ज़ क़रार दिया गया है इसका मक़सद एक अच्छा इंसान बनाना है और अच्छा इंसान उस वक़्त बन सकता है जब इसके हर काम में इख़लास हो ।

मुस्लमान को तो तालीमी मैदान में सब से आगे होना चाहिये, जिस कोर्स में आप दिलचस्पी रखते हैं इसका इंतेख़ाब करें और इस में माहिर बन कर निकलें। महारत ही इंसान को पहचान अता करती है।

आप जितने माहिर होंगे आप का इतना नाम होगा। इम्तेहानात और नाकामी का डर अपने अंदर से निकाल दें। मेहनत कभी बे कार नहीं जाती यक़ीनन कामयाबी आप तमाम के क़दम चूमेगी। इस मौक़ा पर असातिज़ा, अर्फ़ात अली अब्बास, मुहम्मद
इश्तेयाक़ उद्दीन, मुहम्मद नसीर उद्दीन, अबदुलवासे-ओ-दीगर के इलावा तलबा-ए-ओ- तालिबात की कसीर तादाद मौजूद थे।

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