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तालीम तिजारती शय नहीं हो सकती: डाक्टर अबदुल कलाम

वदोदरा, २० जनवरी (पी टी आई) साबिक़ सदर जमहूरीया ए पी जे अबदुल कलाम ने कहा कि तालीम को तिजारती शय के ज़मुरा में शुमार नहीं किया जा सकता या तालीम तिजारती निज़ाम का हिस्सा बन सकती है। सिर्फ बेहतरीन असातिज़ा ही सीखने के मयारात को फ़रोग़ दे सकत

वदोदरा, २० जनवरी (पी टी आई) साबिक़ सदर जमहूरीया ए पी जे अबदुल कलाम ने कहा कि तालीम को तिजारती शय के ज़मुरा में शुमार नहीं किया जा सकता या तालीम तिजारती निज़ाम का हिस्सा बन सकती है। सिर्फ बेहतरीन असातिज़ा ही सीखने के मयारात को फ़रोग़ दे सकते हैं और तलबा में मयारी तालीम के हुसूल का जज़बा पैदा कर सकते हैं।

महाराजा सयाजरन यूनीवर्सिटी और प्रिंस अशोक राज्य गायकवाड़ स्कूल की दो अलैहदा तक़ारीब से ख़िताब करते हुए डाक्टर अबदुल कलाम ने कहाकि हमें आलीशान इमारत या बेहतरीन सहूलतें फ़राहम करने की ज़रूरत नहीं है। हमारे अज़ीम तर कारनामों को मयार के साथ फ़रोग़ देने की भी इतनी एहमीयत नहीं है जितनी कि एक शानदार और बेहतरीन तालीम के साथ अच्छे असातिज़ा की ज़रूरत है।

डाक्टर अबदुल कलाम ने कहा कि इबतिदाई सतह पर तालीम अच्छी असातिज़ा और बेहतरीन निसाब के ज़रीया ही तलबा को एक दूसरे से मरबूत किया जा सकता है। सरपरस्तों, तलबा और असातिज़ा के दरमयान ताल मेल को फ़रोग़ देते हुए तालीम पर तवज्जा दी जा सकती है।

तालीम कोई तिजारती शए या निज़ाम नहीं है बल्कि ये हर दौर की ज़रूरत है। उन्हों ने तालीमी इदारों को मश्वरा दिया कि वो तलबा को असरी टैक्नोलोजी से आरास्ता करें ताकि वो अपने सीखने के अमल में तेज़ी पैदा कर सकें। तालीम के ज़रीया ही तलबा-ए-में सलाहीयतों को फ़रोग़ दिया जा सकता है और उन में सीखने के शौक़ को बढ़ाया जा सकता है।

इस हक़ीक़ी दुनिया में मतलूब जरूरतों को पूरा करने के लिए तालीम ज़रूरी है। ख़ासकर तलबा जब अपने पेशावराना करियर का आग़ाज़ करते हैं तो वो इस के साथ क़ौमी तरक़्क़ी में भी हिस्सा लेते हैं। तहक़ीक़ की इख़तिराई सलाहीयतें आला सतह की टैक्नोलोजी का इस्तेमाल करने की अहलीयत, सनअती पैदावार को फ़रोग़ देने की क़ाइदाना खूबियां और अख़लाक़ी क़ियादत को तालीमी इदारों की जानिब से फ़रोग़ हासिल हुआ है और ये तालीमी इदारे ही क़ौमी तामीरी कामों में हिस्सा लेकर अपना अहम रोल अदा कर रहे हैं।

अगर हम अपने तमाम तलबा-ए-को इन 5 पाँच मयारात से वाबस्ता करें तो बिलाशुबा ये तलबा-ए-तालीम के मैदान में ख़ुद मुख्तार दाई इल्म बन जाऐंगे। इन में ख़ुद एतिमादी आएगी। ख़ुद इन्हिसारी के इलावा तवील उम्र तक वो कुछ सीखते रहने का जज़बा रखेंगे। डाक्टर अबदुल कलाम ने ये भी कहा कि एक साफ़ सुथरा माहौल बनाने के लिए तलबा अपने अतराफ़ कम अज़ कम पाँच पौधें लगाऐं।

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