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ताड़ी पर पाबंदी दलितों पर ज़ुर्म है : मांझी

पटना: पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी एक बार फिर अपने बे तुके बयान से चर्चे में है उन्होंने कहा कि ताड़ी प्राकृतिक पेय है। इस पर पाबंदी दलितों पर ज़ुर्म है। पासी जाति के लोगों का रोजगार नहीं छीनना चाहिए। उनके लिए जीवन बीमा करवाना चाहिए। हिंदुस्तान के अनुसार श्री मांझी ने ये बातें सोमवार को ताड़ी विक्रेता संघ की ओर से आयोजित जनसभा में कही।

नीतीश कुमार ने बिना परामर्श के श्री पाठक के कहने पर प्रतिबंध लगा दिया। जबकि महुआ और ताड़ी गरीबों को सेहतमंद बनाने के लिए जरूरी है। उन्होंने कहा कि सरकार को बिना विकल्प खोजे ताड़ी पर प्रतिबंध नहीं लगाना चाहिए था। ताड़ी शराब नहीं है। इस पर प्रतिबंध आईएएस केके पाठक की देन है।

मांझी ने कहा कि आज ताड़ी सिर्फ पासी जाति के लोगों का व्यवसाय नहीं रहा। यह आदिवासियों, अत्यंत पिछड़ी जातियों का भी व्यवसाय बन चुका है। सरकार ताड़ी में मिलावट की बात कहती है, लेकिन दूध, सब्जी, खोआ अधिकतर चीजों में मिलावट है।इंजेक्शन लगाकर दूध निकाला जा रहा है। सरकार क्या इन पर भी प्रतिबंध लगाएगी। वर्ष 1977 में भी ताड़ी पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया था।

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