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तिहाड़ जेल: 10 मिनट तक चला खूनी खेल और सब देखते रहे

तिहाड़ की जेल नंबर-1 में क़त्ल के जुर्म की सजा काट रहे रविंद्र (29) नाम के एक कैदी का क़त्ल कर दिया गया। उस वक्त दो वॉर्डर यह सब नज़ारा देख रहे थे लेकिन उनकी हिम्मत नहीं हुई कि वे उसे उन 6 कैदियों से बचा सकते। जेल के ज़राये का कहना है कि जेल में

तिहाड़ की जेल नंबर-1 में क़त्ल के जुर्म की सजा काट रहे रविंद्र (29) नाम के एक कैदी का क़त्ल कर दिया गया। उस वक्त दो वॉर्डर यह सब नज़ारा देख रहे थे लेकिन उनकी हिम्मत नहीं हुई कि वे उसे उन 6 कैदियों से बचा सकते। जेल के ज़राये का कहना है कि जेल में कुछ गैंग इतने दबंग हो गए हैं कि उनसे जेल स्टाफ भी उलझने से घबराता है।

इस मामले में जेल इंतेज़ामिया अपने सतह पर जांच कर रहा है। ज़राये ने यह भी बताया है कि क़त्ल के इस मामले में सही जांच नहीं हो पा रही है। इसकी वजह यह है कि जेल नंबर-1 के जिस वॉर्ड नंबर-8 में कैदी रविंद्र का क़त्ल किया गया था , उसमें सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे हुए थे। हालांकि इससे पहले भी जब कैदी सलमान का क़त्ल किया गया था , उस वक्त भी सीसीटीवी कैमरों से कोई मदद नहीं मिल सकी थी।

ज़राये का कहना है कि वॉर्ड नंबर-8 में यह खूनी खेल तकरीबन 10 मिनट तक चलता रहा। पहले तो वहां कोई वॉर्डर या हेड वॉर्डर नहीं था लेकिन बाद में मामले का पता चलने के बाद दो वॉर्डर वहां आ पहुंचे थे। उनके सामने कैदी मुकेश और उसके साथी रविंद्र पर चम्मचों, प्लेट और मेटल की चाकू जैसी नुकीले हथियारों से बेरहमी से वार कर रहे थे।

मगर उनकी यह हिम्मत नहीं हुई कि वह रविंद्र की जान बचा सकें। बाद में जब रविंद्र अधमरा हो गया और हमलावर कैदियों ने उसे छोड़ दिया, तब जाकर जेल स्टाफ उसे डीडीयू अस्पताल ले गए थे।

इस मामले में जेल के एक अफसर ने नाम शाय न होने की शर्त पर बताया कि असल में तिहाड़ की 9 जेलों में इस वक्त तकरीबन 14 हजार सजायाफ्ता और ज़ेर ए गौर कैदी बंद हैं। इनकी सेक्युरिटी और जेलों में कानून‍ निज़ाम कायम रखने के लिए करीब 800 वॉर्डर और हेड वॉर्डर ही हैं जबकि इनकी तादाद तकरीबन 1200 होनी चाहिए और वह भी 6250 कैदियों के लिए।

इस वक्त तिहाड़ में कैदियों की तादाद सलाहियत से दोगुने से भी ज़्यादा हो रही है।

बड़ी वजह यह भी है कि कई मरतबा कैदियों की दूसरे दबंग कैदियों से वक्त रहते हिफाज़त नहीं हो पाती। जो दबंग कैदी हैं उनसे जेल के वॉर्डर और हेड वॉर्डर भी उलझने से घबराते हैं क्योंकि यह कैदी उन्हें भी जान से मारने तक की धमकी दे डालते हैं। ऐसे में ऐसे नामी कैदियों को अलग तरीके से हैंडल किया जाता है।

आपको बता दें कि कैदी रविंद्र की बुध की शाम तिहाड़ की जेल नंबर-1 में मुकेश समेत 6 कैदियों ने क़त्ल कर दिया था । इस वारदात के बाद एक बार फिर से जेल में बंद कैदियों की सेक्युरिटी पर सवालिया निशान उठ रहा है।

जेल नंबर-1 में कैदी रविंद्र के क़त्ल के मामले में दो डिप्टी सुपरिटेंडेंट के ट्रांसफर कर दिए गए हैं। इन्हें जेल नंबर-5 और 7 में भेजा गया है। इनके तबादलों की वजह इनकी इंटेलिजेंस फेल होना बताया जा रहा है। रविंद्र का क़त्ल मंसूबा बनाकर किया गया था।

इसी वजह से तिहाड़ जेल इंतेज़ामिया यह मानकर चल रहा है कि इसकी भनक जेल ओहदेदारों को होना चाहिये था जिसमें लापरवाही बरती गई। इसके अलावा यह भी इशारे मिले हैं कि जेल नंबर-1 के सुपरिटेंडेंट राजेश चौहान का भी ट्रांसफर किया जा सकता है।

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