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तीन तलाक़: पक्षपाती प्रथाएं धर्म के अधिकार को पूर्ण रूप से संघटित नहीं कर सकती- रवि शंकर प्रसाद

हाल ही में विवादों में चल रहे मुद्दे तीन तलाक़ और केंद्र सरकार का इस के प्रति पक्ष का बचाव करते हुए कानून मंत्री, रवि शंकर प्रसाद ने गुरुवार को कहा कि,
जहां भारत धर्म, विश्वास और आस्था के अधिकार का सम्मान करता है, वहीँ पर अनुचित और पक्षपाती प्रथाएँ इस अधिकार को सुरक्षित और पूर्ण रूप से संघटित नहीं कर सकती।

आगे उन्होंने कहा कि, छुआछुत जैसे प्रथाएँ इस बात पर ज़ोर देती है कि हर धर्म को संवैधानिक मान्यताओं पर चलने की ज़रूरत है, इस बात पर ज़ोर दिया कि, लिंग समानता, लिंग न्याय और लिंग गरिमा मोदी सरकार की प्राथमिकताएं हैं।

हम धर्म और आस्था के अधिकारों का सम्मान करते हैं, जो की हम सब के मौलिक अधिकार हैं, लेकिन सब अनुचित और पक्षपाती प्रथाएँ हमारी आस्था को पूर्ण रूप से संघटित नहीं कर सकती।

पि टी आई को एक साक्षात्कार में प्रसाद ने कहा कि, थोड़ी देर के लिए क्या कोई यह बात कह सकता है कि, दलितों के विरुद्ध जो छुआछुत प्रथा है वो मेरी आस्था है, और मैं इसका अभ्यास कर सकता हूँ। इसी तरह से धार्मिक प्रथाएँ भी संवैधानिक मान्यता के अंतर्गत होनी चाहिए।

मुस्लिमों की प्रथा तीन तलाक़ का 7 अक्टूबर को सरकार ने विरोध किया और कहा की इसको धर्म के एक महत्वपूर्ण भाग के तौर पर नहीं देखा जा सकता।

तीन तलाक़ मुद्दे के सवाल पर भाजपा के वरिष्ठ नेता ने जवाब देते हुए कहा कि किसी एक धर्म से सम्बन्ध होने के कारण कोई भी महिला अपने अधिकारों को नहीं खो सकती।

आगे उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि भारत जैसे धर्मनिरपेक्ष देश में एक बड़ी संख्या में महिला अतिसंवेदनशील स्तिथी में रहेगी सिर्फ इसलिए कि वो एक ख़ास धर्म से सम्बन्ध रखती हैं?

गौरतलब है की जब से संविधान अस्तित्व में आया है तब से लिंग समानता ठीक उसके बराबर खड़ी है,
आगे मंत्री ने कहा की, महिला विकास और सशक्तिकरण जैसे मुद्दे सरकार की प्राथमिकता हैं।

आगे उन्होंने कहा की बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान एक बड़ा आंदोलन बन गया और मोदी सरकार की शिशु हत्या के विरुद्ध चलाई गयी मुहीम यह साबित करती है की सरकार लिंग समानता को लेकर गंभीर है।

आगे प्रसाद ने कहा की लखनऊ में विजय दशमी के मौक़े पर दिए गए मोदी के बयान को याद करिये, एक सीता के लिए पूरी लंका जला दी गयी, और तुम हर रोज़ अपने गर्भ में एक सीता को मार रहे हो। मुद्रा योजना की 70 प्रतिशत लाभकारी महिलाएं हैं, सुकन्या समृद्धि योजना में एक करोड़ से ज़्यादा क्रांतिकारी जुड़ गए हैं।
कानून मंत्री ने कहा की कुछ लोग कह रहे हैं कि तीन तलाक़ प्रथा का समापन शरीया और पर्सनल लॉ के खिलाफ है। इन्ही कुछ लोगों की शंका के जवाब में यह मुद्दा हमने उठाया है और अफ्फिडेवितट में भी लिखा है कि, बहुत से ऐसे देश हैं जो तीन तलाक़ को नियंत्रित करते हैं। उन लोगों ने पहले चरम पर ही पंच फैसला, मध्यस्थता और समाधान प्रदान किया है।
बहुत से देशों जैसे, पाकिस्तान, इजिप्ट, ट्यूनेशिया, अफ़ग़ानिस्तान, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, ईरान और मोरक्को ने इस प्रथा को खत्म कर दिया है।

आगे रवि शंकर प्रसाद ने कहा की सीधा सवाल जो में उठा रहा हूँ की अगर इस्लामिक और मुस्लिम देशों में तीन तलाक़ जैसा मुद्दा नियंत्रित है जो पर्सनल लॉ और शरीया के विरुद्ध में नहीं पाया गया तो, वही बहस एक घोषित धर्मनिरपेक्ष जैसे देश भारत में कैसे सही हो सकती है।
आगे उन्होंने सरकार सामान नागरिक सहिंता पर एक अजेंडे के तौर पर काम कर रही है इस सुझाव को भी ठुकरा दिया।

आगे उन्होंने कहा की यह डर की सामना नागरिक सहिंता एक एजेंडे के तौर पर लागू करायी जा रही है पूरी तरह से निराधार है। लॉ कमीशन जांच पड़ताल कर रहे हैं और उनके एक सही समाधान का इंतज़ार कीजिये।

आगे उन्होंने कहा की सरकार के पास फिलहाल कहने को कुछ भी नहीं है, लॉ कमीशन को जाँच कर लेने दीजिये और किसी भी प्रकार के एजेंड़े को में पूरी तरह से गलत ठहराता हूँ।

मंत्री ने आगे आर्टिकल-44 का हवाला देते हुए कहा कि यह सामान सहिंता की बात करता है जिसको संविधान सभा द्वारा संविधान में जोड़ा गया था जिसमें बड़े कद वाले नेता थे, जैसे- जवाहर लाल नेहरू, सरदार पटेल, राजेंद्र प्रसाद, बी.आर. अंबेडकर, मौलाना आज़ाद आदि।

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