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तीन माह में 58 मामलों की रिपोर्ट सौंपे झारखंड सरकार : राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग

रांची : राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने राज्य में कोयला के अवैध खनन के मामले में कोल इंडिया को नोटिस जारी किया है. साथ ही मुआवजा व प्राथमिकी दर्ज नहीं करने के मामले में पीड़ितों को मुआवजा देने का निर्देश दिया है. कोल इंडिया को अवैध खनन मामले में रिपोर्ट देने का निर्देश दिया. वहीं, राज्य सरकार से भी इस मामले में तीन माह के अंदर वस्तुस्थिति पर रिपोर्ट देने काे कहा. वहीं अवैध खनन मामले में पुलिस अधिकारियों को भी नोटिस जारी किया गया है.

आयोग ने दो दिनों में कुल 96 मामलों की सुनवाई की. इसमें से 38 मामलों का निपटारा कर दिया गया है. शेष 58 मामलों में अधिकतम तीन माह के अंदर सरकार को रिपोर्ट देने का निर्देश दिया. आयोग के अध्यक्ष जस्टिस एचएल दत्तु ने गुरुवार को यह जानकारी संवाददाता सम्मेलन में दी. इस मौके पर आयोग के सदस्य जस्टिस डी मुरुगेशन, जस्टिस सी जोसेफ, एससी सिन्हा, आयोग के महासचिव डॉ सत्यनारायण मोहंती और ज्वाइंट सेक्रेटरी डॉ रंजीत सिंह उपस्थित थे.फरजी नक्सल सरेंडर मामले में पूछे गये सवाल का जवाब देते हुए अध्यक्ष जस्टिस एचएल दत्तु ने बताया कि आयोग की जांच टीम ने मामले की जांच की थी. प्रारंभिक जांच में फरजी नक्सल सरेंडर का मामला सही पाया गया है. इस संबंध में आयोग ने सरकार को अपनी अनुशंसा भेजी है. सरकार की ओर से उस पर जवाब दिया जाना है. राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष व सदस्य की नियुक्ति नहीं होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि सरकार ने इन पदों को जल्द भरने की बात कही है. आयोग की तीन सिंगल बेंच ने कुल 69 मामलों की सुनवाई की. उनमें से 27 मामलों का निपटारा किया गया. निपटाये गये मामलों में ओल्ड एज पेंशन, विधवा पेंशन, जमीन आवंटन और प्राथमिकी दर्ज नहीं करने से संबंधित मामले थे. आयोग ने एक मामले में प्राथमिकी दर्ज नहीं करने को लेकर पीड़ित को 50 हजार रुपये मुआवजा देने की अनुशंसा की. साथ ही प्राथमिकी दर्ज नहीं करने के एक अन्य मामले में एसपी को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए यह पूछा है कि क्यों न इस मामले में पीड़ित को 25 हजार रुपये का मुआवजा दिया जाये. आयोग ने तीन अन्य मामलों में सरकार को यह निर्देश दिया कि वह इस बात की समीक्षा करे कि इसमें एससी-एसटी एक्ट को लागू किया जा सकता है या नहीं और उसी के अनुरूप मुआवजा दिया जा सकता है या नहीं.

आयोग की दो डिवीजन बेंच ने 12 मामलों की सुनवाई की. उनमें से पांच मामलों का निपटारा किया था. इसमें तीन मामले ऐसे थे, जिसमें आयोग की अनुशंसा के आलोक में सरकार ने 41 लाख रुपये के मुआवजे का भुगतान कर दिया है. आयोग ने 24 घंटे से ज्यादा पुलिस हिरासत में रखे गये 25 लोगों को पांच हजार रुपये प्रति व्यक्ति की दर से मुआवजा देने की अनुशंसा की. सिमडेगा के बानो में फरवरी 2009 में दो बच्चे का अपहरण हो गया था. दोनों बच्चों के शव की बरामदगी के बाद लोगों ने प्रदर्शन किया था. इस दौरान पुलिस ने 25 लोगों को गिरफ्तार कर 24 घंटे से अधिक वक्त तक हिरासत में रखा था. आयोग ने सरकार को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए पूछा कि क्यों न मृतकों को आश्रितों को दो-दो लाख रुपये मुआवजा दिया जाये. दो दिनों तक चली सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से आयोग को जानकारी दी गयी कि सरकार ने विभिन्न मामलों में 50 लाख रुपये पीड़ितों को दिये हैं.

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