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तुर्की में सुरक्षा के ख़िलाफ़ काम कर रहे 7,000 कर्मचारी हुए बर्ख़ास्त

अंकारा : तुर्की ने पिछले साल हुई असफल तख्तापलट की कोशिशों के एक साल होने से पहले 7,000 हज़ार से ज़्यादा पुलिस, मंत्रालयों के कर्मचारियों और शिक्षाकर्मियों को बर्ख़ास्त कर दिया है.

ये कार्रवाई न्यायपालिका, पुलिस और शिक्षा से जुड़े सरकारी संस्थानों में शुचिता लाने के क़दम के रूप में की गई है.

शनिवार को तुर्की में उस घटना को एक साल हो गया है जब कुछ अनियंत्रित सैनिकों ने इमारतों पर बम हमला किया था और आम नागरिकों पर गोलियां चलाई थीं.

उस हिंसा में 250 से ज़्यादा लोग मारे गए थे.

तुर्की अधिकारियों ने इस तख़्तापलट की कोशिशों के लिए मुस्लिम धर्मगुरु फ़तेउल्ला गुलेन पर आरोप लगाया था जिसमें जुलाई 2016 में राष्ट्रपति रचेप तैय्यप अर्दोआन को सत्ता से हटाने की कोशिश की गई थी.

हालांकि अमरीका में रहनेवाले गुलेन ने उस तख़्तापलट में किसी भी भूमिका से इनकार किया था.

तब से अमरीका ने धर्मगुरु के प्रत्यर्पण की तुर्की अधिकारियों की मांग पर चुप्पी साधे रखी है.

कर्मचारियों की हालिया बर्ख़ास्तगी का आदेश पांच जून का है जिसे शुक्रवार को सरकारी गज़ट में प्रकाशित किया गया.

इस आदेश में कहा गया है कि निकाले गए लोग देश की सुरक्षा के ख़िलाफ़ काम कर रहे थे या चरमपंथी संगठन के सदस्य थे.

समाचार एजेंसी रॉयटर के मुताबिक बर्ख़ास्त किए गए लोगों में 2,303 पुलिस अधिकारी, 302 यूनिवर्सिटी शिक्षक, 342 सेवानिवृत्त कर्मचारी और सैनिक हैं.

तख़्तापलट की कोशिशों के बाद से तुर्की ने पहले ही डेढ़ लाख अधिकारियों को बर्ख़ास्त कर दिया है और 50,000 लोगों को सेना, पुलिस और दूसरे क्षेत्रों से गिरफ़्तार किया है.

सरकार का कहना है कि देश की सुरक्षा के ख़्याल से ये कदम उठाए जाने ज़रूरी थे, लेकिन आलोचकों का कहना है कि राष्ट्रपति अर्दोआन दरअसल इस कथित शुद्धिकरण के ज़रिए राजनीतिक विरोधियों को कमज़ोर कर रहे हैं.

इस्तांबुल में बरसी की याद दिलाते बड़े-बड़े पोस्टरों से अटा पड़ा है जिनमें लोग तख़्तापलट समर्थक सैनिकों का विरोध करते नज़र आ रहे हैं.

बरसी की याद में बड़ी रैलियां होने वाली हैं जिनमें राष्ट्रपति रचेप तैय्यप अर्दोआन ठीक उसी समय संसद को संबोधित करेंगे जब पिछले साल हमला हुआ था.

बीबीसी के मार्क लोवेन के मुताबिक अर्दोआन और उनके समर्थक सैन्य तख़्तापलट में जीत को तुर्की के पुनर्जागरण के रूप में देखते हैं जबकि कई अन्य लोग ऐसा नहीं मानते.

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