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तृणमूल कांग्रेस यू पी ए की ताईद से दस्तबरदार

कोलकाता, १९ सितंबर (पी टी आई) तृणमूल कांग्रेस ने आज अपने वुज़रा की मर्कज़ी हुकूमत से दसतबरदारी (हट जाने) और अपनी ताईद ( समर्थन) भी वापस लेने का फ़ैसला करते हुए यू पी ए को शदीद झटका दिया लेकिन आइन्दा तीन यौम (दिन) में मुम्किना मुसालहत (फैसल

कोलकाता, १९ सितंबर (पी टी आई) तृणमूल कांग्रेस ने आज अपने वुज़रा की मर्कज़ी हुकूमत से दसतबरदारी (हट जाने) और अपनी ताईद ( समर्थन) भी वापस लेने का फ़ैसला करते हुए यू पी ए को शदीद झटका दिया लेकिन आइन्दा तीन यौम (दिन) में मुम्किना मुसालहत (फैसला/ समझौता) के इमकानात (संभावना को) बरक़रार रखे।

लोक सभा में 19 अरकान के साथ यू पी ए की दूसरी सब से बड़ी शराकत (भागीदारी/ समझौते वाली) जमात ने अपने एम पीज और आला क़ाइदीन ( बड़े नेताओं) की मीटिंग के बाद हैरानकुन फ़ैसले का ऐलान करते हुए ये तनबीहा भी सामने रख दी कि अगर हुकूमत अपने फ़ैसले वापस लेती है तो पार्टी अपने मौक़िफ़ ( निश्चय) पर नज़रसानी ( पुन: विचार) कर सकती है।

तृणमूल कांग्रेस सरबराह ममता बनर्जी अपने फ़ैसले पर नज़रसानी ( पुन: विचार) के लिए चाहती हैं कि एफ डी आई पर फ़ैसले से मुकम्मल दसतबरदारी इख़तियार की जाय, रियायती एल पी जी पर हद में छः से 12 तक इज़ाफ़ा किया जाय और डीज़ल की क़ीमत में 5 रुपय इज़ाफे़ को 3 रुपय या 4 रुपय तक घटा दिया जाय।

हम हमारी ताईद ( समर्थन) वापस ले रहे हैं। हमारे वुज़रा ( मंत्रीगण) दिल्ली जाऐंगे, वज़ीर-ए-आज़म से मुलाक़ात करेंगे और अपने इस्तीफ़े जुमा को सहपहर 3 बजे पेश कर देंगे, टी एम सी सरबराह और चीफ़ मिनिस्टर मग़रिबी बंगाल ममता बनर्जी ने पार्टी एम पीज, आला क़ाइदीन ( बड़े/ उच्च श्रेणी के लीडरों) और ओहदेदारों की मीटिंग के बाद ये ऐलान किया।

अगर तृणमूल कांग्रेस ताईद ( समर्थन) से दसतबरदारी ( हट जाने) के अपने फ़ैसले पर बरक़रार रहती है तो यू पी ए की आधी ताक़त 251 तक घट जाएगी , जो 545 रुकनी लोक सभा में 272 के अक्सरीयती ( बहुमत) निशान से 21 कम है । ताहम (यद्वपी) बाहर से ताईद ( समर्थन) करने वाली हलीफ़ ( मित्र/ दोस्त) जमातें & समाजवादी पार्टी ( 22 ) , बी एस पी (21) और बाअज़ दीगर ( कुछ अन्य) की हिमायत के साथ हुकूमत हनूज़ ज़ाइद अज़ 300 अरकान की ताईद ( समर्थन) के साथ इतमीनान बख्श मौक़िफ़ में है ।

कांग्रेस ने ताहम (अभी तक) बेपरवाही ज़ाहिर की जैसा कि इस ने अपना मौक़िफ़ दोहराया कि तृणमूल कांग्रेस हनूज़ काबिल-ए-क़दर हलीफ़ है और कहा कि वो ममता बनर्जी की जानिब से उठाए गए मसाइल ( सम्स्याओं) पर हुकूमत से बात करेगी । ज़राए ( सूत्रों) ने कहा कि सदर कांग्रेस सोनीया गांधी तवक़्क़ो ( आशा/ उम्मीद) है इस मुआमले पर वज़ीर-ए-आज़म से बात करेंगी और ऐसे आसार हैं कि एल पी जी सिलेंडर्स पर तहदीद ( सीमित संख्या/ मात्रा) को 6 से बढ़ाकर सालाना 9 सिलेंडर्स किया जा सकता है ।

अमली तौर पर तीन दिन की मोहलत कांग्रेस और हुकूमत को मुफ़ाहमत (समझौते/ फैसले) के लिए कुछ गुंजाइश फ़राहम करती है और मुबस्सिरीन ( देखने वालों) का एहसास है कि इसके लिए हुकूमत को अपने गुज़श्ता हफ़्ता के फ़ैसलों से दसतबरदारी ना होने के अपने मौक़िफ़ ( निष्चय) में कुछ नरमी लानी पड़ सकती है ।

आज की तबदीली पर एक नुमायां रद्द-ए-अमल अमल में समाजवादी पार्टी ने वाज़िह ( स्पष्ट) कर दिया कि वो तृणमूल के फ़ैसले से मुतास्सिर ( प्रभावित/ सहमत) नहीं होगी और अपनी आज़ाद राय रखेगी । तृणमूल के मनमोहन सिंह हुकूमत में 6 वुज़रा ( मंत्री) हैं जिन में एक को काबीनी ( Cabinet) दर्जा हासिल है और दीगर वुज़राए ( अन्य मंत्री) ममलकत ( राज्य मंत्री) हैं ।

जहां ममता बनर्जी अपनी पार्टी के क़ाइदीन ( लीडरों) के साथ मीटिंग मुनाक़िद ( आयोजित) कर रही थीं , वहीं वज़ीर-ए-आज़म ने सीनीयर काबीनी रफ़क़ा पी चिदम़्बरम और शरद पवार के साथ ताज़ा सूरत-ए-हाल ग़ौर-ओ-ख़ौज़ ( विचार) किया । एन सी पी के लीडर पवार ने वज़ीर-ए-आज़म को यक़ीन दिलाया कि इन की पार्टी भरपूर अंदाज़ में हुकूमत के साथ है ।

ममता बनर्जी ने कहा कि मर्कज़ी हुकूमत कोई वाहिद (एक) जमाती हुक्मरानी नहीं है। हुकूमत का दीगर (पार्टीयों) की ताईद ( समर्थन) पर इन्हिसार (निर्भर) है, लेकिन बंगाल में हमारी अपनी अक्सरीयत (बहुसंख्यक) है और हम दीगर पर मुनहसिर ( आश्रित/ निरभर) नहीं हैं।

ममता ने हुकूमत की बाहर से ताईद को ये कहते हुए ख़ारिज अज़ इमकान क़रार दिया कि इन का फ़ैसला नियम दिल्ली से नहीं है। कांग्रेस पर तन्क़ीदों (आलोचनाओं) को वुसअत ( का विस्तार ) देते हुए उन्होंने कोयला बलॉक अलाटमेंट स्क़ाम, स्याह ( काला) धन और खाद की क़ीमत में इज़ाफ़ा जैसे मसाइल ( समस्याएं) भी सामने लाए। चीफ़ मिनिस्टर मग़रिबी बंगाल ने कहा कि एफ डी आई से मुताल्लिक़ फ़ैसला कोयला स्क़ाम को दबाने के लिए किया गया।

उन्होंने कांग्रेस को धमकी आमेज़ ( मिलने वाला) सियासत में मुलव्वस होने का मौरिद इल्ज़ाम ठहराते हुए कहा कि जब कभी उसे अपने किसी हलीफ़ ( दोस्त/ समर्थको) से परेशानी लाहक़ होती है तो वो दीगर ( दूसरो) से रुजू हो जाती है। ममता ने कहा, जब उसे मायावती से मसला होता है तो वो मुलायम सिंह यादव से रुजू हो जाती है।

जब उसे मुलायम से परेशानी होती है तो वो नितीश (जनता दल यू के नितीश कुमार) के पास जाती है और ऐसा ही चलता रहता है। एफ डी आई से मुताल्लिक़ फ़ैसले का तज़किरा करते हुए उन्होंने कहा कि ग़ैर मुनज़्ज़म ( संगठित) रीटेल सेक्टर से 50 मिलीयन अफ़राद वाबस्ता ( परिचित/संबंधित) हैं।

ये लोग कहां जाएंगे? बर्बादी होगी। ये चीज़ मग़रिब में तक काबिल ताईद नहीं रही है। कांग्रेस पर ब्लैक मेल वाली सियासत में मुलव्वस होने का इल्ज़ाम आइद करते हुए तृणमूल सरबराह ने कहा कि किसी को तो बिल्ली के गले में घंटी बांधनी होगी। ममता ने इन्किशाफ़ (ज़ाहिर) किया कि उन्होंने एफ डी आई से मुताल्लिक़ फ़ैसलों पर अपनी मुख़ालिफ़त से रास्त सदर कांग्रेस सोनीया गांधी को वाक़िफ़ कराया था लेकिन इस का असर नहीं हुआ।

ममता ने वज़ीर फायनेन्स पी चिदम़्बरम के ब्यान पर भी तन्क़ीद की जिस में कल उन्हों ने एफडी आई के बारे में फ़ैसले से दसतबरदारी को ख़ारिज अज़ इमकान क़रार दिया है। उन्हों ने कहा कि इन तमाम इक़दामात के बाद कांग्रेस अब पैंशन बल की भी इजाज़त देगी लेकिन ममता ने पार्लीमैंट में इस की भरपूर मुख़ालिफ़त करने का अज़म किया।

उन्होंने कहा, अगर हम कोई फ़ैसला ना करें तो वो पेंशन के शोबे ( सेकटर) में तक बैरूनी अवामिल को कुबूल कर लेंगे। हम (ये सूरत-ए-हाल) बर्दाश्त नहीं कर सकते। हम कोई भी अवाम दुश्मन फ़ैसले बर्दाश्त नहीं करेंगे और हम (ऐसी) हर चीज़ की मुख़ालिफ़त करेंगे।

उन्होंने कहा कि अगर मुल्क को वस्त मुद्दती चनाव के लिए मजबूर किया जाता है तो उन की पार्टी ज़िम्मेदार नहीं रहेगी। उन्होंने कहा, ये हुकूमत (मज़ीद) तीन माह या छः माह चल सकती है, मै नहीं जानती। वो एतबार खो चुके हैं। और अगर वो हम से दोस्ती नहीं निभा सकते हैं तो किसी के साथ भी दोस्ती बरक़रार नहीं रख सकते। उन्होंने काला धन मसला भी उठाते हुए इस्तिफ़सार किया कि क्यों हुकूमत ने उसे वापिस लाने के लिए इक़दामात ( कार्य) नहीं किए हैं।

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