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तेरे सफर की तारीफ़ में मै फिर भी तनहा :अब्दुल हमीद अंसारी

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अब्दुल हमीद अंसारी। siasat hindi

ऐसा लगता है, सब कुछ अपने पास रखना चाहती है बीजेपी। नफरत भी, मोहब्बत भी, सिर्फ उसे इंसानियत से नफरत है। हर बात पर समाज को बाटने की बात करने वाली बीजेपी हर मौके का फायदा उठाना चाहती है। ऐसा लगता है कि सिर्फ हिंदुस्तान के मुसलमान इनके लिए अछूत है, बाकी दुनिया के मुसलमान इनके लिए अपना सगा भाई हैं।

मै कल से सिर्फ यही सोच रहा हूँ कि अगर मोदी मुसलमान होते और ये मौजूदा वाकया पेश आता , तो क्या होता? क्या राय होती लोगों की ? मैंने इस बात को भाजपा के उन लिड़रानो के बयानों पर लिखा है जो मुआशरे में नफरत फैलाने का काम किया करते है। अगर पाकिस्तान से रिश्ते अच्छे होते हैं तो हम हिंदुस्तान के मुसलमानों को सबसे ज्यादा खुशी होगी, हम जानते हैं कि इनके नफरतों की हवाओं में सबसे ज्यादा घर हमारा जलता है, हर बात पर पाकिस्तान भेजने की बात कही जाती है, हमारे तार हर बात पर पाकिस्तान से जोड़ दिया जाता है। मुसलमानों को हमेशा से पाकिस्तान के अलग होने का कर्ज चुकाना पड़ता है।

मुसलमानों के हर एक गलती को पाकिस्तान का हमदर्द समझा जाता है, ऐसा लगता है कि हम पाकिस्तान के फायदे के लिए सब कुछ कर रहे हैं, ये इलजाम इस मुल्क के मुआशरे को दिमक से भी ज्यादा खाया है, मुसलमानों को हमेशा चोट पहुँचाया है । सच पूछिए तो हिंदुस्तान से पाकिस्तान के अलग होने की सजा सिर्फ यहां के मुसलमानों को खूब उठाना पड़ा है। मुसलमानों के हर एक खिदमत को जो हिंदुस्तान के लिए किए गए हैं, उसे खिदमत नहीं समझा गया है, मुल्क की मोहब्बत नहीं समझी गई।

बेशक हमारे पास मौका था कि हम पाकिस्तान चले जाते, मगर हमने अपने मुल्क में रहना पसंद किया, मुल्क की इत्तेहाद को कमजोर होने से बचाया, मगर नफरत की आग को हाथों में लेकर घुमने वालों ने सबसे पहले हमारा घर जलाया। अफसोस तो तब होता है, जब कोइ इस मुल्क का झंडा हमारे हाथों से छीन लेना चाहता है, हमें अपने मुल्क की मोहब्बत से जुदा करना चाहता है। सिर्फ और सिर्फ पाकिस्तान के नाम पर, जब कि दुर दुर तक कोइ वास्ता नहीं है पाकिस्तान से।

हम पैदा हुए हिंदुस्तान में,पठ़ – लिखकर बड़े हुए इस मुल्क में, हमारी दोस्ती हिंदू से, हमारे पड़ोसी हिंदू, मगर कुछ लोग हमारी मोहब्बत ए मुल्क को नहीं समझते हैं।हमारा ईद तब तक मुकम्मल नहीं होता है, जब तक हमारे यहाँ के हिंदू भाई सेवइयाँ न खा ले, हम नमाज के बाद फौरन घरों के तरफ रवाना हो जाते हैं कि हमारे घर हिंदू भाई सेवइयाँ खाने के लिए आयेगें। उनकी मोहब्बत हमारे ईद को और खूबसूरत बना देता है।

एक बार फिर कहना चाहता हूं कि हमारे दिलों से इस मुल्क की मोहब्बत को छिनने की कोशिश नहीं होने चाहिए , इस मुल्क में हम इत्तेहाद को बरकरार रखना चाहते हैं।नफरत की आग को रखने वाले शायद तुम्हें बदलना ही होगा, मुआशरे को मजबूत बनाने के लिए तुम्हें अपनी नज़रियात को इंसानी नज़रियात बनाना होगा।शायद यही सच्चाई है।

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