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तेलंगाना के रियासती फूल, दरख़्त , परिंदे और जानवर का इंतेख़ाब

हुकूमत तेलंगाना ने रियासती परिंदा, जानवर , दरख़्त और फूल के इंतेख़ाब का एलान किया। चीफ़ मिनिस्टर के चंद्रशेखर राव‌ सेक्रेट्रियट में सुबह हुकूमत के इस फ़ैसले का एलान किया।

हुकूमत तेलंगाना ने रियासती परिंदा, जानवर , दरख़्त और फूल के इंतेख़ाब का एलान किया। चीफ़ मिनिस्टर के चंद्रशेखर राव‌ सेक्रेट्रियट में सुबह हुकूमत के इस फ़ैसले का एलान किया।

रियासती परिंदे की हैसियत से मुंतख़ब चिड़िया, तेलुगु कल्चर और बिलख़सूस बतकमां तहवार के लिए नेक शगून समझी जाती है। सफ़ैद और नीली चिड़िया को तेलुगु में पालापट्टा भी कहा जाता है।

इस तरह हिरन को रियासती जानवर के तौर पर मुंतख़ब किया गया है। दशहरा तहवार में पूजा के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले दरख़्त जमी चिटो को रियासती दरख़्त बनाया गया है।

जबकि पीले फूल जिन्हें तेलुगु में तनगड़ो कहा जाता है तेलंगाना के रियासती फूल होंगे। इस मौके पर मुख़ातिब करते हुए चीफ़ मिनिस्टर ने कहा कि तेलंगाना को तरक़्क़ी के रास्ता पर तेज़ रफ़्तार पेशरफ़त करना है इस लिए इस परिंदे को तेलंगाना का रियासती परिंदा बनाया गया है।

जमी दरख़्त भी कामयाबी की अलामत समझा जाता है जबकि तनगड़ वफोल ख़वातीन की भलाई-ओ-ख़ुशहाली की अलामत है। उन्होंने कहा कि हिरन एक हस्सास जानवर है जो अपनी सादगी और सफ़ाई के लिए शौहरत रखता है। हिरन से तेलंगाना अवाम के मिज़ाज की अक्कासी होती है। उन्होंने कहा कि माज़ी में आंध्र के ज़ावीए से इन चीज़ों का इंतेख़ाब किया गया था और अब तेलंगाना के ज़ावीए से इंतेख़ाब अमल में आया है।

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