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तेलंगाना सरकार के दावे एक तरफ और स्कीमात पर बजट खर्च का मामला निराशाजनक

हैदराबाद 01 नवम्बर: अल्पसंख्यक कल्याण के लिए तेलंगाना सरकार के दावे एक तरफ और स्कीमात पर बजट खर्च का मामला चिंताजनक है। सरकार ने आर्थिक संकट के मद्देनजर सभी कल्याणकारी स्कीमात बजट रोकने के लिए विभाग फाइनैंस को निर्देश दिया है। यह नुस्खा के तहत अन्य मह्कमाजात की तरह अल्पसंख्यक कल्याण भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

मालीयाती वर्ष 2016-17 के तीन सहि माही बीत चुके हैं लेकिन सरकार ने अल्पसंख्यक कल्याण के लिए जो बजट जारी किया है, वह अत्यंत अपर्याप्त है। इस साल सरकार ने अल्पसंख्यक कल्याण के लिए 1200 करोड़ रुपये आवंटित किए थे लेकिन पाठकों को यह जानकर आश्चर्य होगा कि व्यावहारिक रूप से केवल 270 करोड़ रुपये ही जारी किए गए।

नवीनतम आंकड़े जो राजनीति के पास उपलब्ध है उसके अनुसार कई महत्वपूर्ण स्कीमात के लिए बजट की इजराई असंतोषजनक है। शादी मुबारक स्कालरशिपस और फ़ीस बाज़ अदायगी जैसी योजनाओं के लिए सरकार ने बजट में निश्चित राशि जारी नहीं की। मुख्यमंत्री को पेश आंकड़ों के अनुसार तीन सहि माही बीतने के बावजूद 25 अल्पसंख्यक स्कीमात पर 270 करोड़ 95 लाख रुपये खर्च किए गए। 28 अक्टूबर के ताजा आंकड़ों में बताया गया है कि विभाग फाइनैंस में 249 करोड़ 57 लाख रुपये की इजराई से संबंधित बिल लंबित है।

उनकी इजराई लंबे समय से नहीं किया गया और अगर यह राशि जारी कर दी जाए तो इस साल अल्पसंख्यक कल्याण पर खर्च की गई राशि बढ़कर 635 करोड़ होगी। अब जबकि मालीयाती वर्ष की तीन सहि माही करीब है, अल्पसंख्यक कल्याण के लिए आवंटित किया आधा बजट खर्च भी संभव नजर नहीं आ रहा है।

सरकारी आंकड़े सरकार के इन दावों नकारना है, जिसमें अल्पसंख्यक कल्याण के लिए भारी रक़ूमात खर्च करने की बात की जा रही है। छात्रवृत्ति के लिए 50 करोड़ रुपये बजट में आवंटित किए गए थे और अब तक एक रुपया भी जारी नहीं किया गया। इसी तरह फीस रेिंबर्समेंट के लिए 223 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, और 66 करोड़ 31 लाख रुपये ही खर्च किए गए हैं।

फ़ीस बाज़ अदायगी की यह स्थिति छात्रों और अल्पसंख्यक कॉलेजस लिए परेशान बनी हुई है। अल्पसंख्यक कॉलेजस फीस के लिए छात्रों पर दबाव बना रहे हैं और बताया जाता है कि कई कॉलेजस आर्थिक संकट का शिकार हैं। बैंकों से मरबूत सब्सीडी स्कीम के लिए बजट में 150 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे लेकिन केवल 34 करोड़ 50 लाख रुपये ही खर्च किए गए।

उर्दू घर शादीख़ानों का निर्माण किया आवंटित गए 23 करोड़ से 5 करोड़ 75 लाख खर्च किए गए। वक्फ बोर्ड की सहायता और इमाम और मउज़नों के मानदेय के लिए 16 करोड़ 25 लाख रुपये जारी किए गए जबकि बजट में 65 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। सर्वेक्षण आयुक्त समर्पित दो करोड़ में से केवल 50,000 रुपये ही जारी हुए हैं।

सी ई डी एम और तेलंगाना हज कमेटी को अली उल-तरतीब 75,000 और 2 करोड़ 25 लाख रुपये जारी किए गए जबकि दोनों का बजट प्रति व्यक्ति 3 करोड़ रुपये है। हज कमेटी ने केवल 75 हजार रुपये खर्च किए हैं और डेढ़ करोड़ रुपए के बिल विभाग वित्त में लंबित हैं। प्रे मेट्रिक छात्रवृत्ति के लिए 7 करोड़ 27 लाख रुपये खर्च किए गए जबकि 20 करोड़ रुपए के बिल विभाग वित्त में लंबित हैं। शादी मुबारक स्कीम के लिए बजट में 150 करोड़ आवंटित किए गए थे और अब तक 19 करोड़ 79 लाख खर्च किए गए जबकि 21 करोड़ के बिल लंबित हैं।

प्रवासी छात्रवृत्ति के लिए बजट में 30 करोड़ आवंटित किए गए थे जबकि 15 करोड़ जारी किए गए। 6.87 करोड़ खर्च किए गए और 8 करो पर्वत रुपये की इजराई विभाग फाइनै‍ंस अभी बाकी है। इस तरह कुल मिलाकर 1200 करोड़ में से 635 करोड़ 36 लाख की इजराई प्रक्रिया में आई और 270 करोड़ 95 लाख रुपये खर्च किए गए। 249 करोड़ 57 लाख के बिल विभाग फाइनैंस की मंजूरी का इंतेजार है। रिपोर्ट में बताया गया है कि विभाग अल्पसंख्यक कल्याण को आगामी 5 महीने में अधिक 502 करोड़ 26 लाख की इजराई की आवश्यकता होगी।

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