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त्रिपुरा की वामपंथी सरकार पशु बलि परंपरा को दे रही है बढ़ावा

त्रिपुरा।अपनी राजनीतिक विचारधारा से से अलग हटकर त्रिपुरा की वामपंथी सरकार राज्य में काली पूजा के मौके पर भव्य पशु बलि को प्रायोजित करने वाली है। सरकार के इस फैसले के बाद सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसके खिलाफ नाराजगी जाहिर की है। राज्य के उदयपुर कस्बे में स्थित प्रसिद्ध त्रिपुरेश्वरी मंदिर में दो दिन तक काली पूजा का उत्सव होता है। इस दौरान बड़ी संख्या में पशुओं की सार्वजनिक तौर पर बलि दी जाती है।

हिन्दुस्तान टाइम्स में प्रकाशित एक खबर के मुताबिक सरकार ने सफाई देते हुए कहा है कि उसका यह फैसला साल 1949 में भारत और त्रिपुरा के बीच हुए विलय संबंधी समझौते के मुताबिक है।  सामाजिक कार्यकर्ता कहते हैं कि पहले इस उत्सव का खर्च राजा उठाते थे और अब उनकी जगह  ये काम लोकतांत्रिक सरकार कर रही है।  रिपोर्ट के मुताबिक राज्य सरकार वर्षों पुराने खार्ची और केर पूजा जैसे जातीय उत्सवों के लिए भी संसाधन मुहैया कराती है। इन उत्सवों में मुर्गों और बकरियों की बलि दी जाती है।

एनिमल राइट की समाजिक कार्यकर्ता ने सरकार के इस फैसले का विरोध किया है। उनका कहना है कि सरकार को इस उत्सव को किसी जानवर का खून बहाए बिना इस परंपरा चलानी चाहिए। पशुओं की जगह सरकार सब्जियों की बली देनी चाहिए।

वामपंथी विचारधारा विज्ञान की बात करता है। उनके आइडिया ऑफ इंडिया में ऐसे समाज की परिकल्पना है जहां विज्ञान और तर्क को बढ़ावा मिले। लेकिन भारत की राजनीति की भंवर में फंसी वामपंथी सरकार उसी ढर्रे पर चल रही है जिसमें आमतौर पर सभी पार्टियां चलती है। यानी विचारधारा के उलट वोट बैंक की राजनीति।

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