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दफ़्तर बोर्ड आफ़ एंटर मीडीएट नामपली के बाब अलद अखिला पर मंदिर तामीर करने की कोशिश

हैदराबाद । २‍६। जुलाई : ( नुमाइंदा ख़ुसूसी ) : हिंदूस्तान को दुनिया की सब से बड़ी जमहूरीयत कहा जाता है जहां कसरत में वहदत का हक़ीक़ी नज़ारा देखने को मिलता है । मुल्क में सैकूलर अज़म मज़बूत-ओ-मुस्तहकम नज़र आता है । इस के बावजूद मुट्ठी

हैदराबाद । २‍६। जुलाई : ( नुमाइंदा ख़ुसूसी ) : हिंदूस्तान को दुनिया की सब से बड़ी जमहूरीयत कहा जाता है जहां कसरत में वहदत का हक़ीक़ी नज़ारा देखने को मिलता है । मुल्क में सैकूलर अज़म मज़बूत-ओ-मुस्तहकम नज़र आता है । इस के बावजूद मुट्ठी भर शरपसंदों के बाइस अमन-ओ-अमान की फ़िज़ा मुतास्सिर होती रहती है ।

फ़िकऱ्ापरस्तअनासिर का सरकारी दफ़ातिर में ही ग़लबा दिखाई देता है । यही वजह है कि सरकारी दफ़ातिरों दवा ख़ानों , तालीमी इदारों वग़ैरा के अंदरूनी हिस्सों या फिर बाब उल-दाख़िलों परमज़हबी ढाँचे तामीर किए जा रहे हैं और इस का सिलसिला मुसलसल जारी है जब भी मौक़ा मिलता है अचानक किसी भी मुक़ाम पर मज़हबी ढांचा तामीर होजाता है । ऐसा लगता है कि इस मुआमला में फ़िकऱ्ापरस्त मौक़ा की तलाश में रहते हैं । ऐसा ही एकमज़हबी ढांचा बोर्ड आफ़ एंटर मीडीट के दफ़्तर विद्या भवन नामपली में तामीर किया जा रहा था लेकिन मीडीया की बरवक़्त मुदाख़िलत के बाइस मंदिर की तामीर को रोक दिया गया ।

अख़बारी नुमाइंदों के पहूंचने के एक घंटा बाद एक रुकन असैंबली भी पहूंचे और मुआइना क्या । आप को याद दिला दें कि दफ़्तर बोर्ड आफ़ एंटर मीडीट एजूकेशन विद्या भवन नामपली का उस वक़्त के मर्कज़ी वज़ीर-ए-ताअलीम प्रोफ़ैसर नूर-उल-हसन ने 27 नवंबर 1976 को संग-ए-बुनियाद रखा था रियासत में इसी दौरान आँजहानी जी वेंगल राव‌ चीफ़ मिनिस्टर के ओहदा पर फ़ाइज़ थे ।

इमारत की तामीर के साथ ही बाअज़ अनासिर ने दफ़्तर के उक़बा हिस्सा में गै़रक़ानूनी तौर पर एक मंदिर तामीर करचुके थे लेकिन अब जैसे ही स्टाफ़ के चंद अरकान को पता चला कि नामपली एक मीनार मस्जिद रोड पर अनक़रीबमास्टर प्लान आने वाला है या मास्टर प्लान पर अमल किया जाने वाला है तब स्टाफ़ के चंद नाआक़बत अंदेश अरकान ने एक मंसूबा के तहत मैन बाब अलद अखिला के बिलकुलबाज़ू 10×10 फुट का गहिरा गड्ढा खोद कर मंदिर की तामीर शुरू करदी । ये काम सुबह ही शुरू हो चुका था ।

हमारे इस्तिफ़सार पर स्टाफ़ ने बताया कि वो इसी मुक़ाम पर मंदिरतामीर कररहे हैं । ये कहने पर कि पहले ही से दफ़्तर के उक़बा हिस्सा में मंदिर मौजूद है फिर मंदिर की क्या ज़रूरत है ? तब दफ़्तर के स्टाफ़ ने बताया कि वास्तव के लिहाज़ से ये जगह मंदिर के लिए मौज़ूं है इस लिए मंदिर का काम शुरू किया गया है ।

बहरहाल अख़बारी नुमाइंदों के बरवक़्त वहां पहूंचने पर गै़रक़ानूनी तौर पर मंदिर तामीर करने वाले अनासिर में खलबली मच गई । डिपार्टमैंट की जानिब से बताया गया है कि फ़िलहाल काम रोक दिया गया है ।।

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