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दबिस्ताँ जलील शोबा-ए-ख़वातीन का दीनी-ओ-अदबी इजलास

हैदराबाद ।१९ । जुलाई (रास्त) दबिस्ताँ जलीलऔ शोबा-ए-ख़वातीन का दीनी-ओ-अदबीइजलास 15 जुलाई हामिदी बेगम साहिबा की सदारत डाक्टर फ़र्ज़ाना हमीद, राबिया नयाज़ जलीली की निगरानी में मुनाक़िद हुआ। मुहतरमा सादिया मुश्ताक़ इस जलसा की मेहमान

हैदराबाद ।१९ । जुलाई (रास्त) दबिस्ताँ जलीलऔ शोबा-ए-ख़वातीन का दीनी-ओ-अदबीइजलास 15 जुलाई हामिदी बेगम साहिबा की सदारत डाक्टर फ़र्ज़ाना हमीद, राबिया नयाज़ जलीली की निगरानी में मुनाक़िद हुआ। मुहतरमा सादिया मुश्ताक़ इस जलसा की मेहमान ख़ुसूसी और मुहतरमा मह जबीन दाई थीं।

मुहतरमा बुशरा सुलताना की क़रणत कलाम पाक के बाद मुहतरमा अफरा सुलताना ने हमद बारे-ए-ताला और मुहतरमा सय्यदा गोसिया बेगम ने नाअत शरीफ़ सुनाई । मुहतरमा मर्यम ज़मानी ने सूरा-ए-आल-ए-इमरान रुकवा नंबर 19 की तफ़सीर और शान-ए-नुज़ूल ब्यान की । अदबी नशिस्त में मुहतरमा रफ़ीअह नौशीन ने निहायत उम्दा मज़मून पेशा मुहतरमा शबीना फ़रशूरी ने मुतास्सिर कुन अफ़साना खोया हुआ प्यार मुहतरमा सईदा अफ़रोज़ ने असर अंगेज़ अफ़साना ज़िंदगी है या कोई तूफ़ान ही और मुहतरमा अतीया नूर उल-हक़ ने दिलचस्प मज़मून चिराग़ का जिन्न पेश किया ।मुहतरमा नुसरत रिहाना ने फ़िक्र अंगेज़ नज़म एक अकेली डगर सुनाया ।

मुहतरमा अतहरी , डाक्टर रियाज़ फ़ातिमा तशहीर, मुहतरमा मुशर्रफ़ काज़मी और मुहतरमा नुसरत रिहाना ने अपना कलाम सुनाया और दाद पाई । मुहतरमा सादिया मुश्ताक़ ने तमाम अदबीतख़लीक़ात का तफ़सीली जायज़ा लिया, उन्हें सराहा और मुफ़ीद मश्वरे दिए । डाक्टर हुमैराजलीली इस जलसा की नाज़िम थीं।

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