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दरामद कुनुन्दगान का ज़ख़ीरा अंदोज़ी से इस्तिस्ना का मुतालिबा

नई दिल्ली: दाल की कीमतों में इज़ाफ़ा का सिलसिला जारी है, आज दाल दरामद करने वालों ने एक लाख किलो ग्राम दाल रोज़ाना 1.35 रुपये फ़ी किलो ग्राम की शरह पर सरबराह करने का पेशकश करते हुए हुकूमत से ख़ाहिश की कि उन्हें ज़ख़ीरा अंदोज़ी की हद से इस्तिस्ना दिया जाये।

जब दालों के बोहरान में शिद्दत पैदा हो गई तो मर्कज़ ने दरामद-ओ-बरामद कुनुन्दगान , सरकारी स्टोरस और लाईसेंस याफ़ता ग़िज़ा महफ़ूज़ करने वाली कंपनियों को हिदायात जारी की थी कि वो अपनी ज़ख़ीरा अंदोज़ी की हद पाबंदी करे। ताकि ज़ख़ीरा अंदोज़ी पर क़ाबू पाया जा सके।

एसा मालूम होता है कि दरामदात से सरबराही में इज़ाफ़ा होना चाहिए लेकिन बेन वज़ारती इजलासों में मर्कज़ी वज़ीर फाइनेंस अरूण जेटली ने आज दाल बरामद कुनुंदों से मुलाक़ात कर के आलमी बाज़ार से दाल के हुसूल में दरपेश मसाइल के बारे में उनसे तबादले ख़्याल किया।

इजलास के बाद सदर नशीन दालों और ग़िज़ाई अजनास की हिन्दुस्तानी एसोसीएशन‌ प्रवीण डोंगरे ने एक प्रेस कान्फ़्रेंस से ख़िताब करते हुए कहा कि दरामद कुनुंदों पर पहले ही 25 लाख टन दालें जनवरी तक सरबराह करने का बोझ आइद किया गया है। तकरीबन ढाई लाख टन बंदरगाहों पर मौजूद है।

उन्होंने कहा कि किसी भी किस्म की तहदेदात से ये ज़रीया ख़त्म हो जाएगा।

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