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दलायल अलख़ीरात की तिलावत नबी करीम (स०अ०व०) की ज़्यारत का ज़रीया

दरूद शरीफ़ के बेशुमार फ़ज़ाइल हैं जिन में काबिल ज़िकर ये के दरूद पढ़ने वाले का दिल ज़िंदा और हिदायत याफ़ता बन जाता है। इस की मुहताजी और बदबख़ती दूर होती है।

दरूद शरीफ़ के बेशुमार फ़ज़ाइल हैं जिन में काबिल ज़िकर ये के दरूद पढ़ने वाले का दिल ज़िंदा और हिदायत याफ़ता बन जाता है। इस की मुहताजी और बदबख़ती दूर होती है।

नफ़ाक़ और मेल कुचैल से दिल पाक होजाता है और दिल मे इशक़ मुहब्बत नबी करीम (स०अ०व०) मे इज़ाफ़ा होता है। तहारत और पाकीज़गी हासिल होती है।

पाबंदी से दरूद की कसरत करने वाले के नज़दीक संकरात के वक़्त नबी करीम (स०अ०व०) तशरीफ़ फ़रमाते हैं जिस से उन की जान निकलने मे तकलीफ़ ही महसूस नहीं होती।

इन ख़्यालात का इज़हार मौलाना क़ाज़ी सय्यद शाह आज़म अली सूफ़ी कादरी सदर कुल हिंद जामिआतुल‌ उलमशाइख़ मुतर्जिम दलायल उलख़ीरात ने जामा मस्जिद आज़म पूरा मे दलायल उल खेरात मे उर्दू तर्जुमे की रस्म अजरा के मौके पर किया जिस मे मौलाना सय्यद शाह अहमद नूर उल्लाह हसनी हुसैनी कादरी मुतवल्ली सज्जादा नशीन आस्ताना शाहिद ये टीकमाल ने बहैसीयत मेहमान ख़ुसूसी शिरकत की।

रस्म अजरा के मौके पर मौलाना डाक्टर हाफ़िज़ सय्यद शाह मुर्तज़ा अली सूफ़ी हैदर कादरी, मौलाना मुहम्मद सूफ़ी, मौलाना सय्यद शाह मुस्तफ़ा सईद कादरी , जनाब लईक सोफियानी और जनाब सय्यद अनीस सोफियानी भी मौजूद थे

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