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दलितों को दलितों से लड़ा कर भाजपा चाहती है पंजाब की सत्ता में वापसी

पंजाब में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने दलित वोट बैंक को आकर्षित करने के लिए दलित नेता व केंद्रीय मंत्री विजय सांपला को प्रदेश की कमान सौंपी लेकिन पार्टी की दलितों के प्रति आकर्षण की यह योजना सफल नहीं हो पा रही है बल्कि उलटा दलित समुदाय के लोग आपस में ही उलझ गए हैं। प्रदेश भाजपा की तरफ से इस खींचतान को समाप्त करने के लिए कोई ठोस कदम न उठाए जाने के कारण नेताओं के भीतर वैर-विरोध बढ़ता जा रहा है।
 
होशियारपुर लोकसभा सीट के तहत आते फगवाड़ा विधानसभा क्षेत्र में सोम प्रकाश तथा विजय सांपला के बीच गुटबाजी किसी से छुपी नहीं है। जानकारी के अनुसार मंगलवार को विजय संकल्प यात्रा के दौरान भी दोनों गुटों की तरफ से एक-दूसरे पर खूब हमले किए गए। 
 

सवाल यह पैदा हो रहा है कि भाजपा के एक दलित नेता जो वहां पर विधायक हैं, को साथ लेकर चलने की बजाय उनको उत्साहित किया जा रहा है जो फिलहाल न तो विधायक हैं और न ही पार्टी की तरफ से उन्हें उम्मीदवारी दी गई है। प्रदेश भाजपा की गलत नीतियों के कारण फगवाड़ा सीट पर दलित बनाम दलित वाली स्थिति पैदा हो रही है जोकि पार्टी के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है।
 
पंजाब में दलित वर्ग की 5 सीटों में से तीसरी भोआ सीट पर भी दलित समुदाय में खींचतान पैदा की जा चुकी है। यहां से विधायक सीमा देवी की टिकट कटवाने के लिए राज्य के सत्तासीन दलित नेता के करीबी खींचतान कर रहे हैं। मैदान में कई अन्य लोगों को उतार कर उनके माध्यम से सीमा देवी की टिकट काटने का प्रयास किया जा रहा है। ऊपर से दिलचस्प बात यह है कि जिस प्रकार अपने ही विधायक के खिलाफ कुछ भाजपा के दलित नेता प्रचार कर हे हैं, उससे यह बात साफ है कि टिकट जिसे भी मिले पर जीत हासिल करना आसान नहीं होगा।

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