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दलितों होशियार, कांग्रेस के झांसे में ना आना: बाल ठाकरे

मुंबई, ०३ जनवरी (पी टी आई) शिवसेना सरबराह बाल ठाकरे ने इंदू मिल की आराज़ीयात को डाक्टर अंबेडकर की यादगार क़ायम करने के लिए हवालगी के मर्कज़ी हुकूमत के फ़ैसला पर अपना रद्द-ए-अमल ज़ाहिर करते हुए कहा कि दलित कांग्रेस के हर्बों का शिकार ना ब

मुंबई, ०३ जनवरी (पी टी आई) शिवसेना सरबराह बाल ठाकरे ने इंदू मिल की आराज़ीयात को डाक्टर अंबेडकर की यादगार क़ायम करने के लिए हवालगी के मर्कज़ी हुकूमत के फ़ैसला पर अपना रद्द-ए-अमल ज़ाहिर करते हुए कहा कि दलित कांग्रेस के हर्बों का शिकार ना बनें।

पार्टी के तर्जुमान अख़बार सामना में एक ब्यान देते हुए उन्हों ने कहा कि कांग्रेस की नज़र अब बलदी इंतिख़ाबात पर है और इंदू मिल की आराज़ीयात डाक्टर अंबेडकर यादगार क़ायम करने के लिए दिया जाना दरअसल आँजहानी क़ाइद से ख़ुलूस-ओ-मुहब्बत का इज़हार नहीं है बल्कि दलितों के ववटस पर नज़र है।

बलदी इंतिख़ाबात इंतिहाई एहमीयत के हामिल हैं और इस में दलितों को बादशाह गिर होने का मौक़िफ़ हासिल है लिहाज़ा उन्हें राग़िब करने ये तमाशा किया जा रहा है । मुंबई बलदिया में शिवसेना।बी जे पी इत्तिहादी शराकतदार हैं। इंतिख़ाबात आइन्दा माह मुनाक़िद शुदणी हैं।

अपनी बात जारी रखते हुए उन्हों ने दलितों को होशयार और चौकस रहने का मश्वरा दिया कि इंतिख़ाबात में कांग्रेस को नज़रअंदाज करते हुए शैव शक्ति। भीम शक्ति को कामयाबी से हमकनार करें जो दरअसल शिवसेना , बी जे पी और आर पी आई सहि रुख़ी इत्तिहाद है।

दलितों को कांग्रेस की चिकनी चुपड़ी बातों में आने की चंदाँ ज़रूरत नहीं है । शिवसेना सरबराह ने कहा कि आराज़ीयात की हवालगी केलिए उन्हों ने in-principle की इस्तिलाह इस्तिमाल की है जिस पर काफ़ी एतराज़ात किए जा रहे हैं और ग़ैर यक़ीनी माहौल पैदा किया जा रहा है जबकि इस के सीधे सादे मानी यही होते हैं कि उसूलों को बालाए ताक़ रखते हुए काम किया गया। डाक्टर अंबेडकर बेशक हिंदूस्तानी आईन के मुअम्मार हैं लेकिन अचानक नया साल आते ही उन की याद कैसे आ गई ।

ना तो उन की पैदाइश की सालगिरा है और ना ही उन की बरसी । फिर ये बेवक़त की रागिनी कैसी ? अलबत्ता यहां इस बात का तज़किरा ज़रूरी है कि मर्कज़ी हुकूमत ने दलित तंज़ीमों के एहतिजाज के बाद मुंबई के दादर इलाक़ा में वाक़्य इंदू मिल की 12.5 एकड़ आराज़ीयात हुकूमत महाराष्ट्रा के हवाले करने का फ़ैसला किया था ताकि आँजहानी दलित क़ाइद की मुनासिब यादगार क़ायम की जा सके।

इस मौक़ा पर महाराष्ट्रा के वज़ीर-ए-आला पृथ्वी राज चौहान की क़ियादत में एक कल जमाती वफ़द ने वज़ीर-ए-आज़म मनमोहन सिंह से मुलाक़ात की थी और उन्हों ने भी आराज़ीयात की हवालगी का तीक़न दिया था ।

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