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‘दलित मुस्लिम विरोधी हिंसा के खिलाफ’ लखनऊ में रिहाई मंच ने दिया धरना, मंच का आरोप –पुलिस लगी है दोषियों को बचाने में

तकरोही में दलितों के पीटे जाने की घटना ने साबित किया गुजरात दोहराने की हो रही है कोशिश

लखनऊ, 3 अगस्त 2016। रिहाई मंच ने ‘दलित मुस्लिम विरोधी हिंसा के खिलाफ’ हजरतगंज स्थित अंबेडकर प्रतिमा पर धरना दिया। धरने के माध्यम से मुखयमंत्री को संबोधित 11 सूत्रीय ज्ञापन भेजा।

रिहाई मंच अध्यक्ष मुहम्मद शुऐब ने कहा है कि जिस तरह से 28 जुलाई को तकरोही इंदिरानगर में मृत गाय ले जा रहे दो दलितों विद्यासागर और छोटे को पीटा गया और गाली गलौज की गई, लेकिन पुलिस द्वारा आरोपियों के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट/ और दो समुदायों के बीच घृणा पैदाकर सद्भावना को बिगाड़ने का अभियोग के तहत मुकदमा नहीं पंजीकृत किया गया, वह साबित करता है कि पुलिस अपराधियों को बचा रही है। उन्होंने कहा कि मुजफ्फरनगर में एक बार फिर जिस तरह से संघ परिवार ने दादरी दोहराने की कोशिश की और आजमगढ़ में संजरपुर के तीन युवकों को फर्जी मुठभेड़ में घायल व गिरफ्तार दिखाया गया यह घटनाएं साफ करती हैं कि प्रदेश सरकार आरएसएस के दलित-मुस्लिम विरोधी एजेंडे को ही लागू कर रही है।

रिहाई मंच लखनऊ की महासचिव रफत फातिमा और शकील कुरैशी ने कहा कि बुलंदशहर में हाई वे पर मां-बेटी के साथ सामूहिक बलात्कार की घटना ने एक बार फिर साफ किया कि सूबे में महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा महिला व दलित उत्पीड़न की घटनाएं यूपी से हैं। वहीं रिहाई मंच नेता अमित मिश्रा ने कहा कि सपा सरकार में भी दलितों और मुसलमानों पर बढ़ती संघी हिंसा अखिलेश सरकार की संघी मानसिकता को साबित करता है।

रिहाई मंच महासचिव राजीव यादव ने कहा कि मृत जानवर निस्तारण से जुड़े दलितों को सुरक्षा मुहैया कराने में प्रशासन पूरी तरह विफल ही साबित नहीं हुआ है बल्कि ऐसी घटनाओं में खुद उसकी भूमिका भी आपराधिक साबित होती जा रही है। ऐसे में इस पेशे से जुड़े लोगों को आत्मरक्षा हेतु सरकार अपनी पहल पर लाइसेंसी हथियार उपलब्ध कराए। मुसलमानों को सम्प्रदाय सूचक गाली देने व उत्पीड़ित करने की बढ़ती प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए एससीएसटी ऐक्ट की तरह ही नया कानून बनाया जाए। उन्होंने बताया कि पिछले दिनों अखलाक के बेटे सरताज ने रिहाई मंच दफ्तर पर आ कर नेताओं से मुलाकात कर पूरे मामले के बारे में बताया। सूबे में जगह-जगह गाय की रक्षा के नाम पर जय गुरूदेव, गोरक्षा समिति जैसे संगठनों द्वारा की जा रही वाॅल राइटिंग व उत्तेजक भाषणों पर रोक लगाई जाए।

रिहाई मंच नेता अमित मिश्रा ने मांग की कि गौहत्या के अफवाह में मारे गए दादरी के अखलाक मामले में फाॅरेंसिक जांच में की गई हेरा-फेरी के अपराधियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करते हुए अखलाक के हत्यारों को सजा दी जाए और अखलाक के परिवार के खिलाफ दर्ज किए गए गोकशी के फर्जी मुकदमे को तत्काल वापस लिया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार को यह बताना चाहिए कि दादरी में गौकशी के नाम पर हुए आपराधिक षडयंत्र की पुलिस द्वारा आज तक विवेचना क्यों नहीं की गई।

धरने का संचालन रिहाई मंच नेता अनिल यादव ने किया। धरने को अमित मिश्रा, प्रोफेसर रमेश दीक्षित, नीति सक्सेना, जनचेतना से लाल चंद, आली से रेणू, दीपक कबीर, कैराना के मोहम्मद अली, भूरे लाल, शाहरूख, डीएस बौध, जैनब सिद्दीकी, हादी खान, रफीउद्दीन खान, कमर सीतापूरी, जुबैर जौनपूरी, एहसानुल हक मलिक, अली रजज, इनायतुल्ला खान, एमडी खान, असगर मेंहदी, राॅबिन वर्मा, दलित शोषण मुक्ति मंच के   विनोद रावत, शम्स तबरेज खान, अबू अशरफ जीशान, सृजन योगी आदियोग, विरेंद्र गुप्ता, अतहर हुुसैन, आशीष अवस्थी, रामकुमार, कल्पना पांडे, अजय शर्मा, डाॅ मजहरूल हक, आदि ने संबोधित किया। इनके अलावा धरने में यासिर अजीज, जौनपुर से इरशाद, शबरोज मोहम्मदी, अबुअशरफ जीशान, एच आर वर्मा, शाहनवाज आलम, जनचेतना की गीतिका, जीशान अहमद, भीम वर्मा, आली से प्रियंका, शबाना, फुहार, फैजी किदवई, हरिभान यादव, वर्तिका शिवहरे, प्रतीक सरकार, शशांक लाल, यावर अब्बास, मोहम्मद दाऊद आदि प्रमुख रूप से शामिल रहे।

 

मुखयमंत्री को संबोधित 11 सूत्रीय ज्ञापन निम्नलिखित मांग रखी गयीं है –

1- सूर्या सिटी तकरोही इंदिरा नगर, लखनऊ से मृत गाय को निस्तारित करने के लिए ले जा रहे दलित समुदाय के विद्यासागर और छोटे को निर्ममता पूर्वक पीटने व गाली-गलौज करने वालों को तत्काल गिरफ्तार किया जाए।

2- दलित समुदाय के विद्यासागर और छोटे की निर्ममतापूर्वक पिटाई व गाली गलौज करने वालों पर इंदिरा नगर थाने में दर्ज मुकदमा काफी कमजोर है। मुकदमे में एससीएसटी एक्ट, सामूहिक रूप से पिटाई व जबरन रोकने के लिए उपयुक्त 147, 148, 153 ए व 342 धाराओं का कोई उल्लेख नहीं है। अतः मुदकमे में उपरोक्त धाराओं को लगाया जाए।

3- उत्तर प्रदेश में पशु निस्तारण करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए विशेष नीति बनाई जाए, जिसमें उन्हें पहचान पत्र भी जारी किए जाएं।

4- मुजफ्फरनगर में गौकशी के नाम पर मुस्लिम परिवार पर हमला करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।

5- सांप्रदायिकता व तनाव पैदा करने वाले नेताओं पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

6- बुलंदशहर में हाई वे पर मां-बेटी के साथ सामूहिक बलात्कार करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करते हुए प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा की गारंटी की जाए।

7- संजरपुर आजमगढ़, के तीन युवकों आफताब, सलमान और अकरम जिन्हें स्थानीय बाजार से पुलिस द्वारा उठाए जाने के 2 दिन बाद फर्जी मुठभेड़ में घायल और गिरफ्तार दिखाते हुए सांप्रदायिक हिंसा में उनकी संलिप्तता बताई गई है, उस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।

8- सूबे में जगह-जगह गाय की रक्षा के नाम पर जय गुरूदेव, गोरक्षा समिति जैसे संगठनों द्वारा की जा रही वाल राइटिंग व उत्तेजक भाषणों पर रोक लगाई जाए।

9- मृत जानवर निस्तारण से जुड़े दलितों को सुरक्षा मुहैया कराने में प्रशासन पूरी तरह विफल ही साबित नहीं हुआ है बल्कि ऐसी घटनाओं में खुद उसकी भूमिका भी आपराधिक साबित होती जा रही है। ऐसे में इस पेशे से जुड़े लोगों को आत्मरक्षा हेतु सरकार अपने पहल पर लाइसेंसी हथियार उपलब्ध कराए।

10- मुसलमानों को सम्प्रदाय सूचक गाली देने व उत्पीड़ित करने की बढ़ती प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए एससीएसटी ऐक्ट की तरह ही नया कानून बनाया जाए।

11- गौहत्या के अफवाह में मारे गए दादरी के अखलाक मामले में फाॅरेंसिक जांच में की गई हेरा-फेरी के अपराधियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करते हुए अखलाक के हत्यारों   को सजा दी जाए और अखलाक के परिवार के खिलाफ दर्ज किए गए गोकशी की हत्या के फर्जी मुकदमे को तत्काल वापस लिया जाए। दादरी में गौकशी के नाम पर हुए आपराधिक षडयंत्र की पुलिस द्वारा विवेचना तीव्र गति से की जाए।

 

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