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दलित समुदाय के ख़िलाफ़ बढ़ती असहिष्णुता के विरोध में जया ने पूरे शरीर पर पोत लिया कालिख़

कोच्चि : नीची जाति वाले दलित समुदाय के ख़िलाफ़ बढ़ती असहिष्णुता के विरोध में साउथ इंडियन लड़की ने कथित रूप से चेहरे और शरीर पर कालिख पोतने क अजीब फैसला ले कर सबको चौंका दिया है.26 साल की जया पीएस कला में ग्रिजुएट हैं और कोच्चि की रहने वाली हैं.

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बीबीसी के अनुसार उन्होंने कहा कि, “रोहित वेमुला की मौत के बाद मैंने निश्चय कर लिया कि मैं जब भी पब्लिक प्लेस में जाउंगी शरीर को काले रंग में रंग कर ही जाऊंगी.” तो अब जया जब भी स्टूडियो से बाहर निकलती हैं, अपने शरीर को कोलिरीयम नाम के एक पेंट से रंगती हैं. यह पेंट एक तरह का आईशैडो है. रोहित वेमुला कथित भेदभाव के कारण आत्महत्या कर ली थी. जया कहती हैं, “यह ख़बर मेरे लिए दर्दनाक थी. मैंने देश के दूसरे वेमुलाओं के साथ एकजुटता दिखाने के लिए ऐसा करने के बारे में सोचा.”उनकी बहन शरीर पर रंग लगाने में उनकी रोज़ मदद करती हैं. इस काम में पूरे 2 घंटे लग जाते हैं. उन्होंने  ऐसा इसलिए किया क्योंकि हमारी जाति व्यवस्था में काले रंग को बहुत हिक़ारत से देखा जाता है. “जाति को रंग के साथ जोड़ कर देखा जाता है. जो कुछ भी काला है उसे समाज में स्वीकार नहीं किया जाता. ख़ुद को काले रंग में रंग देने के बाद मैंने इस भेदभाव को महसूस किया.”जया बताती हैं कि रोहित उन्हीं की उम्र के थे, इसलिए उनके मन में सवाल उठा, “जो सुविधाएं मुझे मिल रही हैं वो उन्हें क्यों नहीं मिली. जया कहती हैं कि भले इससे समाज की पारंपरिक धारणाएं टूट जाएं, लेकिन वे अपना संदेश दूसरों तक पहुंचाने के लिए ताक़तवर तरीक़ों का इस्तेमाल करना चाहती थीं. जया ने शपथ ली है कि वे विरोध में 125 दिनों तक ‘काला’ रंग लगाएंगी. विरोध के आख़िरी दिन यानि 26 मई को वे शहर में एक ‘बड़ा कार्यक्रम’ आयोजित करना चाहती हैं, जिसमें दलित लेखक, कलाकार और कार्यकर्ता भाग लें.

इस वजह से उन्हें कई तरह के तजरबों का सामना करना पड़ा “एक बार मैं बस में जा रही थी. एक महिला मुझे देखकर चिल्ला पड़ी. उसने मुझे पूतना कहा.” केरल भारत का सबसे अधिक साक्षरता वाला राज्य है. लेकिन यहां भी रंग मायने रखता है. काफ़ी लोग काले रंग की लड़की से शादी नहीं करना चाहते हैं.वे कहती हैं, “जब मैं चल रही होती हूं तब लोगों को मैं काले रंग की दिखती हूं, लेकिन जब मैं उनके पास पहुंचती हूं तब लोग सवाल करते हैं. मैं उन्हें ऐसा करने के पीछे की राजनीति समझाती हूं. कुछ सकारात्मक होते हैं जबकि कुछ मुझ पर हंसते हैं.”  “समय आ गया है कि कलाकार समाज को संवेदनशील बनाने के लिए काम करें. समाज में महिला, जाति और रंग के नाम पर भेदभाव होता है.” कई कलाकारों और मीडिया ने इस विरोध में जया का समर्थन किया है.

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