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दवाओ तक आम आदमी की रसाई (पहुँच)को यक़ीनी बनाने की ज़रूरत

नई दिल्ली, १२ अक्टूबर (पी टी आई) सुप्रीम कोर्ट ने डाक्टरों की जानिब से तशख़ीस (नियुक़्त) किए जाने वाले दवाओं की क़ीमत आम आदमी की दस्तरस (पहुँच) से बाहर होने का नोट लेते हुए कहा कि हुकूमत को चाहीए कि वो अहम दवाओं को ज़रूरी अदवियात ( दवाएं) की

नई दिल्ली, १२ अक्टूबर (पी टी आई) सुप्रीम कोर्ट ने डाक्टरों की जानिब से तशख़ीस (नियुक़्त) किए जाने वाले दवाओं की क़ीमत आम आदमी की दस्तरस (पहुँच) से बाहर होने का नोट लेते हुए कहा कि हुकूमत को चाहीए कि वो अहम दवाओं को ज़रूरी अदवियात ( दवाएं) की फ़हरिस्त ( सूची/ List) में शामिल करे और क़ीमतों में इज़ाफ़ा को रोकने के लिए अपनी फार्मा पालिसी तैयार करे।

सुप्रीम कोर्ट ने हुकूमत के इस रवैय्या पर भी तन्क़ीद (समीक्षा) की कि वो गुज़श्ता 17 साल के दौरान दवाओं की क़ीमतों पर क़ाबू पाने में कुछ नहीं किया। जस्टिस जी ऐस सिंघवी और एस जे मक्खू उपाध्याय पर मुश्तमिल ( सम्मिलित) बेंच ने कहा कि डाक्टरों की जानिब से तशख़ीस करदा (लिखी हुई )दवाएं आम आदमी की दस्तरस (पहुँच) से बाहर हो रही हैं।

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