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दशकों बाद बसपा ने अयोध्या में उतारा मुस्लिम उम्मीदवार

लखनऊ: बसपा ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में दशकों बाद अयोध्या से मुस्लिम उम्मीदवार उतार कर परंपरा तोड़ी है. इस बार सबसे ज्याादा मुस्लिम प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं. उदाहरण के लिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कुल 149 सीटों में से 50 पर बसपा ने मुसलमानों को टिकट दिया है.

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जनसत्ता के अनुसार,1980 के दशक के बाद संभवत: ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी भी राजनैतिक पार्टी ने अयोध्या से मुस्लिम को टिकट दिया है. बसपा ने यहां से बज़्मी सिद्दीकी को उतारा है. वे पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं. दारुल उलूम के घर देवबंद से भी बसपा ने 1993 के बाद पहली बार मुस्लिम को उतारा है. यहां से माजिद अली को टिकट दिया गया है. अयोध्या से बसपा कभी नहीं जीती है लेकिन देवबंद में उसे दो बार 2002 और 2007 में जीत मिली. 2002 में राजेंद्र सिंह राणा और 2007 में मनोज चौधरी बसपा प्रत्याशी के रूप में विजयी हुए थे. देवबंद में वर्तमान में कांग्रेस की माविया अली विधायक हैं.

अयोध्या की सीट 1991 के बाद से 21 साल तक भाजपा के पास रही थी. लेकिन 2012 में सपा के पवन पांडे ने भाजपा के लल्‍लू सिंह को हराकर यह सीट छीन ली. यहां पर तीन लाख वोटर हैं और स्थानीय बसपा नेताओं का अनुमान है कि इनमें 50 हजार मुस्लिम व 60 हजार दलित हैं. बसपा को उम्मीाद है कि उसके उम्मीदवार को सपा के मुस्लिम वोट मिल जाएंगे.
पिछले साल अक्टूबर में एक महिला ने बज़्मी सिद्दीकी के खिलाफ रेप की शिकायत दर्ज कराई थी. फैजाबाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी. हालांकि सिद्दिकी ने इन आरोपों से इनकार किया और कहा कि यह उनकी छवि को खराब करने की साजिश है.

उन्होंने बताया कि आजादी के बाद पहली बार मुख्य धारा की पार्टी ने मुस्लिम को उतारा है. मुझे लगता है कि यह अयोध्या में साम्प्रदायिक सद्भाव बनाने की जिम्मेदारी है. अयोध्या के लोग शांतीप्रिय हैं और वे भाजपा की सांप्रदायिकता की राजनीति नहीं चाहते. उनका फैजाबाद में कारोबार है. वे अब रियल इस्टेट का काम भी करते हैं.

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