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दस रुपए के शपथपत्र पर लिख भेजा तलाक, पीड़िता ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया

हरिद्वार। सुल्तानपुर की एक पीड़िता ने तीन तलाक़ के मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। तीन तलाक से सम्बंधित सुप्रीम कोर्ट पहुंचने वाला उत्तराखंड से यह पहला मामला है। मामले के अनुसार सुल्तानपुर निवासी मजहर हसन ने अपनी बेटी अतिया साबरी की शादी 25 मार्च 2012 में जसोदरपुर गांव निवासी वाजिद अली पुत्र नसीर अहमद के साथ की थी।
अतिया ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कहा है कि ससुराल पक्ष शादी के बाद से ही दहेज की मांग को लेकर उसे प्रताड़ित कर रहा था। दो बेटियां सादिया और सना के पैदा होने पर उनका अत्याचार और बढ़ गया। आरोप है कि 13 नवंबर 2015 को ससुराल पक्ष ने अतिया के साथ मारपीट कर घर से निकाल दिया। इसके बाद से वह अपने मायके में रह रही है। दो महीने पहले अतिया के भाई रिजवान साबरी की संस्था साबरी फरीदी विकास समिति के सुल्तानपुर स्थित कार्यालय में एक तलाकनामा भेजा गया।

जिसमें दो नवंबर 2015 की तारीख में एक 10 रुपये के शपथपत्र पर तीन बार तलाक लिखकर भेजा गया। दारुल उलूम देवबंद का एक फतवा भी तलाकनामें के साथ लगाया गया। अचानक पिछले साल तलाक की जानकारी मिलने पर अतिया साबरी ने अपने अधिवक्ता राजेश पाठक, अभिषेक चक्रवर्ती और मुकेश जैन के जरिये सर्वोच्च अदालत में याचिका दायर की।

अतिया साबरी का कहना है कि जब निकाह के वक्त पति पत्नी दोनों की सहमति जरूरी है तो तलाक एक तरफ कैसे हो सकती है। अतिया ने कहा कि यह तलाकनामा उसे रिसीव तक नहीं हुआ है। मामले में ससुराल पक्ष सहित केंद्रीय कानून, महिला एवं बाल कल्याण, अल्पसंख्यक मंत्रालय और दारुल उलूम देवबंद को पक्षकार बनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका स्वीकार कर 16 फरवरी तक सभी पक्षकारों को तलब किया है।

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