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दस साल में भी अधूरा रहा आदर्श इस्लामी समाज बनाने का सपना

केरल। करीब 10 साल पहले एक विचारधारा के मानने वाले दो दर्जन मुस्लिम परिवारों ने फैसला किया कि वो आबादी से कहीं दूर जंगल के करीब जाकर अपना एक अलग गांव बसायेंगे। यह गांव बना और यहां आदर्श इस्लामी समाज बनाने के लिए मस्जिद, मदरसा भी बना लेकिन यहां के लोग अब मानते हैं कि यह सलाफी विलेज एक फ्लॉप प्रोजेक्ट साबित हुआ है। यहां 20 घर हैं और हाल के वर्षों में यहां के युवक सीरिया और इराक में लड़ने के लिए चले गए हैं।

सलाफी इस्लाम के मानने वाले यासिर अमानत सलीम कहते हैं कि सलाफी विलेज एक फ्लॉप प्रोजेक्ट साबित हुआ है। यह कोई रोमानी दुनिया बसाने की कोशिश नहीं थी, उनकी कोशिश थी कि एक आदर्श इस्लामी समाज बनाया जाये जहाँ शांति के साथ इस्लाम के बताए हुए सही रास्ते पर बिना किसी रुकावट के चला जा सके लेकिन यह सपना आज भी अधूरा है। यहां के सभी लोग कट्टरपंथी सुन्नी विचारधारा सलफ़ी के मानने वाले हैं।

ये वही गाँव है जो पिछले कुछ महीनों से सुर्ख़ियों में है क्योंकि यहाँ के निवासी कट्टर इस्लाम को मानने वाले हैं जो समाज की मुख्यधारा से कट कर गांव में आबाद हो गए हैं। इस गाँव में मीडिया वालों को अंदर आने से रोका जाता है और बाहर वालों से संपर्क नहीं के बराबर है।

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