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दहश्तगर्दी इल्ज़ामात से बरी नौजवान सरकारी वादों पर अमल आवरी के मुंतज़िर

हैदराबाद । 19 । नवंबर : (अलीम उद्दीन) मक्का मस्जिद और लुंबिनी पार्क और गोकुल चाट भंडार बम धमाकों के बाद दहश्तगर्दी के इल्ज़ामात का सामना करने वाले मुस्लिम नौजवान जिन्हें बाइज़्ज़त बरी करदिया गया । ताहाल सरकारी वादों के मुंतज़िर है

हैदराबाद । 19 । नवंबर : (अलीम उद्दीन) मक्का मस्जिद और लुंबिनी पार्क और गोकुल चाट भंडार बम धमाकों के बाद दहश्तगर्दी के इल्ज़ामात का सामना करने वाले मुस्लिम नौजवान जिन्हें बाइज़्ज़त बरी करदिया गया । ताहाल सरकारी वादों के मुंतज़िर हैं । इन नौजवानों पर लगाए गए इल्ज़ामात और उन्हें दी गई तरह तरह की अज़ीयतों और उन के साथ हुई नाइंसाफ़ीयों-ओ-मज़ालिम को क़ौमी अक़ल्लीयती कमीशन ने तस्लीम करलिया था और हुकूमत आंधरा प्रदेश से सिफ़ारिश की थी कि इन मुतास्सिरा नौजवानों को भरपूर मुआवज़ा दिया जाय ।

कमीशन ने अपने 6 नकाती सिफ़ारिश में जो 9 जुलाई 2011 को दिया था । इस में ना सिर्फ मुआवज़ा की बात कही थी बल्कि उन के ख़िलाफ़ ग़लत-ओ-बेबुनियाद इल्ज़ामात लगाते हुए कार्रवाई करने वाले पुलिस ओहदेदारों के ख़िलाफ़ भी क़ानूनी कार्रवाई की सिफ़ारिश की थी और मुआवज़ा इन पुलिस ओहदेदारों के मुशाहिरा से अदा करने के साथ साथ इन मुस्लिम नौजवानों को उन की क़ाबिलीयत के लिहाज़ से मुलाज़मत देने की भी सिफ़ारिश की थी । ताहम ताहाल रियास्ती हुकूमत की जानिब से किसी किस्म के कोई इक़दामात नहीं किए गए ।

यहां ये बात काबिल-ए-ग़ौर है कि 20 मुस्लिम नौजवानों को मुआवज़ा देने की सिफ़ारिश की गई जब कि इस वक़्त कल 150 नौजवानों के ख़िलाफ़ मुक़द्दमात दर्ज किए गए जब कि पुलिस ने सिर्फ 98 को हिरासत में लेने की बात बताई । और उन में 40 ता 50 जवानों के ख़िलाफ़ मुक़द्दमात दर्ज किए गए । बादअज़ां मुअज़्ज़िज़ अदालत ने 26 नौजवानों को बाइज़्ज़त बरी करदिया ।

जिन 20 नौजवानों को मुतास्सिरीन की फ़हरिस्त में शामिल किया गया है और उन्हें मुआवज़ा देने की बात की जा रही है । इन में ये 20 का हिंदसा मुंदरजा ज़ैल दीए गए आदाद-ओ-शुमार से मेल नहीं खाता । तो फिर 20 ही नौजवानों की बात क्यों की जा रही है । कमीशन ने तीन लाख रुपय फी कस मुआवज़ा देने की सिफ़ारिश की और उन्हें बेहतर किरदार का सदाक़त नामा और मुलाज़मत की फ़राहमी भी ज़रूरी क़रार दिया था । लेकिन अभी तक इस जानिब किसी किस्म के कोई इक़दामात नहीं किए गए । और ना ही इन पुलिस ओहदेदारों को कार्रवाई के दायरे में लिया गया ।

बावसूक़ ज़राए के मुताबिक़ इन ओहदेदारों में चंद को तरक़्क़ी भी हासिल होचुकी है । इस वक़्त तहक़ीक़ात के लिए जो ख़ुसूसी सेल क़ायम किया गया था जिस की निगरानी एक सीनईर आई पी ऐस ओहदेदार कररहा था कुछ अर्सा बाद इस सेल को भी बंद करदिया गया । इस सारी कार्रवाई और इक़दामात में रियास्ती हुकूमत की जानिब से किसी किस्म के कोई मुसबत इक़दामात का ना होना हुकूमत की पालिसी को अयाँ करता है और ऐसा लगता है कि हुकूमत नहीं चाहती कि अक़ल्लीयतों में इस का एतिमाद बहाल होसके और अक़ल्लीयतों का भरोसा हुकूमत पर क़ायम रहे सके ।

जहां तक मुआवज़ा और किरदार के सदाक़त नामों का सवाल है और मुलाज़मत की जहां बात की जा रही है इस ताल्लुक़ से हुकूमत अगर चाहती तो पल भर में इक़दामात करसकती है ? ताहम सरकारी मिशनरी की जानिब से इस मुआमला में पेशरफ़त नहीं होपाई है । इन नौजवानों को आँधा धुंद गिरफ़्तारीयों और उन पर संगीन इल्ज़ामात जो बेबुनियाद साबित हुए उन के ख़िलाफ़ पुलिस की कार्रवाई पर हुकूमत तो ख़ामोश रही लेकिन अब बेगुनाह साबित होने और क़ौमी अक़ल्लीयती कमीशन की सिफ़ारिशात पर भी हुकूमत की ख़ामोशी मुस्लिम अक़ल्लीयत में बेचैनी का सबब बन गई है ।

जहां तक शहर के मौजूदा हालात का सवाल है इस में भी पुलिस वही काम कररही है जो इस ने इस वक़्त किया था । ताहम फ़र्क़ इतना है कि पुलिस ने इस वक़्त आँधा धुंद गिरफ्तारियां कीं थीं और अब आँख बंद कर के बैठी हुई है । पुलिस पर जांबदारी और मुस्लिम अक़ल्लीयत के साथ मुआनिदाना रवैय्या अपनाने के इल्ज़ामात सिर्फ़ इल्ज़ामात नज़र नहीं आरहे हैं ।

शहर में मुस्लिम नौजवानों पर किए जा रहे क़ातिलाना हमलों के वाक़ियात में जहां ये बात साबित होचुकी है कि इन हमलों में हिन्दू दहश्त पसंद तंज़ीमों का हाथ है बराए नाम गिरफ्तारियां पुलिस की पालिसी को ज़ाहिर कररही है । शहर में कल 7 हमले के वाक़ियात में तक़रीबन 20 से ज़ाइद अफ़राद ज़ख़मी होगए और सिर्फ 6 हिन्दू नौजवानों को गिरफ़्तार किया गया ।

शहरीयों में ये रुजहान पाया जाता है कि अगर ये हमला किसी बेजान इमारत या फिर किसी और तबक़ा पर होते और उन हमलों में मुस्लमानों के साथ साथ कोई तबक़ा के अफ़राद भी निशाना बनने तो शायद पुलिस का रवैय्या इस तरह ना होता । जब कि वो शहर के मख़सूस इलाक़ों से अंधा धुंद गिरफ़्तारीयों को अंजाम दे चुकी होती और अब इल्ज़ामात का दौर होना । इन सारे इक़दामात के पीछे हुकूमत के इक़दामात का ना होना हुकूमत की पालिसी पर शकूक-ओ-शुबहात में इज़ाफ़ा करने का मूजिब बन रहा है ।।

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