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दहश्तगर्दी के नाम पर मुसलमानों को हिरासानी मीडिया रविष ग़लत

हैदराबाद 05 अप्रैल: मुल्क में दहश्तगर्दी से मुक़ाबले के नाम पर मुसलमानों को हिरासाँ किया जा रहा है और हिन्दुस्तान की पुलिस अपनी नाअहली को छिपाने इन नौजवानों के ख़िलाफ़ फ़र्ज़ी सबूत-ओ-शवाहिद तैयार करने की कोशिश करती है, लेकिन तक़रीबान तम

हैदराबाद 05 अप्रैल: मुल्क में दहश्तगर्दी से मुक़ाबले के नाम पर मुसलमानों को हिरासाँ किया जा रहा है और हिन्दुस्तान की पुलिस अपनी नाअहली को छिपाने इन नौजवानों के ख़िलाफ़ फ़र्ज़ी सबूत-ओ-शवाहिद तैयार करने की कोशिश करती है, लेकिन तक़रीबान तमाम मुआमलात में पुलिस अपनी कोशिशों में नाकाम होजाती है ।

सदर नशीन प्रेस कौंसिल आफ़ इंडिया जस्टिस मारकंडेय काटजू ने आज एक ख़ुसूसी मुलाक़ात में इन ख़्यालात का इज़हार किया । उन्हों ने मुल्क के निज़ाम पर सवाल उठाते हुए कहा कि आज मुसलमानों को बुराईयों की अलामत ( शैतान ) बनाकर पेश किया जा रहा है और ये तरीका मुल्क के मुफ़ाद में नहीं है ।

उन्होंने ताहम कहा कि जिस तरह से हिन्दुस्तान में अक़लीयतें मज़ालिम का शिकार हैं और उन से इम्तियाज़ बरता जा रहा है वही सूरत-ए-हाल पड़ोसी मुमालिक पाकिस्तान और बंगलादेश में भी है । जस्टिस काटजू ने कहा कि जिस तरह से मुल्क में किसी भी मुक़ाम पर दहश्तगर्द हमलों के फ़ौरी बाद ज़राए इबलाग़ में किसी मुस्लिम तंज़ीम यह नौजवान का नाम पेश करने की रिवायत चल पड़ी है वो दरुस्त नहीं है ।

उसको बदलने की ज़रूरत है क्यूंकि अक्सर ये कयास आराईयां ग़लत साबित होती हैं। उन्होंने कहा कि ये मुआमला प्रेस कौंसिल के दायरे में नहीं आता इसलिए वो अपने तौर पर कोई कार्रवाई नहीं कर सकते, लेकिन उन्होंने उन मसाइल को भी प्रेस कौंसिल के दायरे इख़तियार में लाने हुकूमत से नुमाइंदगी की है।

उन्होंने हिन्दुस्तान में उर्दू के मुस्तक़बिल को ताबनाक क़रार देते हुए कहा कि बर्तानवी सामराज ने हिन्दी को हिन्दुवों की और उर्दू को मुसलमानों की ज़बान क़रार देते हुए समाज में तफ़रीक़ पैदा की थी लेकिन हक़ीक़त ये है कि उर्दू एक इंतिहाई अज़ीम और सेकूलर और बाहुत मीठी ज़बान है ।

इसी हक़ीक़त को उजागर करने के लिए उर्दू विरासत कारवां का आग़ाज़ किया गया है । साथ ही संस्कृत विरासत कारवां भी शुरू करचुके हैं क्योंके इन दोनों ज़बानों का तहफ़्फ़ुज़ हमारी तहज़ीब का तहफ़्फ़ुज़ होगा ।

जस्टिस काटजू ने इस ख़्याल का इज़हार किया कि अब वक़्त आगया है कि मुसलमानों के ख़िलाफ़ होने वाले इन मज़ालिम की रोक थाम और उनके ख़ातमे के लिए क़ौमी सतह पर मुहिम शुरू की जाये ।

उन्होंने इस ख़्याल का इज़हार किया कि नाइंसाफ़ीयों का सिलसिला अगर फ़ौरी ख़त्म नहीं हुआ तो मुल्क में तशद्दुद में इज़ाफ़ा हो सकता है ।

उन्होंने इस सिलसिले में अमली इक़दामात की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए कहा कि वो पहल करते हुए एक गैर सरकारी तंज़ीम कोर्ट आफ़ लास्ट रेसॉर्ट क़ायम कर रहे हैं ताके जो लोग फ़र्ज़ी मुक़द्दमात में फांसे गए हैं उन्हें इंसाफ़ दिलाया जा सके ।

जस्टिस काटजू ने बताया कि मुल्क के मुमताज़ क़ानूनदां फ़ाली इस नरीमान इस तंज़ीम के सरबराह होंगे और उन की निगरानी में माहिरीन की एक टीम काम करेगी ।

आसिफ़ आज़मी तंज़ीम के जनरल सेक्रेटरी होंगे । उन्हों ने बताया कि जब तक समाज में मुसावात का निज़ाम राइज नहीं होगा उस वक़्त तक समाज से बुराईयों का ख़ातमा करना मुम्किन नहीं होसकता। जस्टिस काटजू ने अफ़सोस का इज़हार किया कि हिन्दुस्तानी पुलिस जब किसी मुक़द्दमा में हक़ीक़ी ख़ातियों का पता चलाने में नाकाम होजाती है तो मुसलमानों को इन में माख़ूज़ करके ख़ुद बरी-उल-ज़मा होने की कोशिश करती है ताके ख़ुद अपनी नाएहली छुपा सके और ख़ुद मुअत्तली से बच सके ।

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