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दादरी क़त्ल वाक़िया बदबख्ताना: मोदी

कोलकता 15 अक्टूबर: वज़ीर-ए-आज़म नरेंद्र मोदी ने दादरी क़त्ल वाक़िया और ग़ुलाम अली के मौसीक़ी प्रोग्राम की मुख़ालिफ़त करने को बदबख्ताना और नापसंदीदा क़रार दिया। उन्होंने ये वाज़िह किया कि उनकी हुकूमत का इस तरह के वाक़ियात से कोई ताल्लुक़ नहीं है।

अप्पोज़ीशन ही कसीर उल-वजूद पर सियासत कर रही है और वो नक़ली सेकुलरिज्म में शामिल है। दादरी में एक 52 साला मुस्लिम शख़्स के क़त्ल के वाक़िये पर लब-कुशाई करते हुए उन्होंने अप्पोज़ीशन पर इल्ज़ाम आइद किया कि वो फ़िर्कापरस्ती का हवा खड़ा करते हुए अक़ल्लियतों को वोट बैंक की हैसियत से इस्तिमाल कर रही है।

नरेंद्र मोदी ने बंगाल रोज़नामा आनंद बाज़ार पत्रीका को इंटरव्यू देते हुए कहा कि दादरी वाक़िया या ग़ुलाम अली के ग़ज़लों के प्रोग्रामों की मुख़ालिफ़त करना बदबख्ताना और नापसंदीदा है लेकिन उनकी मर्कज़ी हुकूमत का उन वाक़ियात से कोई ताल्लुक़ नहीं है। पहली मर्तबा उन्होंने दादरी वाक़िये पर रास्त बात की है जहां गोश्त खाने के अफ़्वाह पर एक मुस्लिम शख़्स को हुजूम ने ज़िद-ओ-कूब करके हलाक किया था। अगर चेके पिछ्ले हफ़्ते उन्होंने इंतेख़ाबी रियाली के दौरान बाज़ रिमार्कस भी किए थे। दादरी वाक़िये पर उनकी ख़ामोशी पर अप्पोज़ीशन ने शदीद तन्क़ीद की थी।

मोदी ने कहा कि ग़ुलाम अली के ग़ज़ल प्रोग्राम की मुख़ालिफ़त भी अफ़सोसनाक है। मुंबई में ये प्रोग्राम मुनाक़िद होने वाला था। इस तरह के वाक़ियात पर अपनी पार्टी बी जे पी ने इस तरह के वाक़ियात की हरगिज़ ताईद नहीं की है। अप्पोज़ीशन पार्टीयां बी जे पी के ख़िलाफ़ फ़िर्कापरस्ती का पर्चम बुलंद कर रही हैं और उन वाक़ियात में बी जे पी को घसीटा जा रहा है लेकिन सवाल ये हैके क्या ये पार्टीयां भी एसे वाक़ियात पर सियासत करने में शामिल् नहीं हैं। इस तरह की बेहस-ओ-मबाहिस माज़ी में भी होती है।

बी जे पी ने हमेशा नक़ली सेकुलरिज्म की मुख़ालिफ़त की है। अब इस तरह के वाक़ियात पर बदबख्ताना समाजी मुहिम चलाई जा रही है। एसी बेहस को बातचीत और तबादला-ए-ख़्याल के ज़रीये हल किया जा सकता है। मोदी ने दावा किया कि जो पार्टीयां एसा प्रोपगंडा कर रही हैं वो अक़लियतों की तरक़्क़ी नहीं चाहती और उन्हें सिर्फ वोट बैंक के तौर पर देखती हैं।

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