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दार-उल-उलूम देवबंद को बदनाम करने की कोशिश ना करें: मुहतमिम

दार-उल-उलूम देवबंद ने सहाफ़ीयों से अपील की है कि वो दार-उल-उलूम देवबंद को बदनाम करने की कोशिश ना करें क्योंकि इस इदारे को बदनाम करने की मज़मूम कोशिश हिंदूस्तान और पूरी दुनिया के मुस्लमानों के लिए नाक़ाबिल-ए-बर्दाश्त होती जा रही है

दार-उल-उलूम देवबंद ने सहाफ़ीयों से अपील की है कि वो दार-उल-उलूम देवबंद को बदनाम करने की कोशिश ना करें क्योंकि इस इदारे को बदनाम करने की मज़मूम कोशिश हिंदूस्तान और पूरी दुनिया के मुस्लमानों के लिए नाक़ाबिल-ए-बर्दाश्त होती जा रही है।

दार-उल-उलूम देवबंद के नायब मुहतमिम मौलाना अबदुल ख़ालिक़ मद्रासी की तरफ़ से आज यहां जारी एक रीलीज़ में बताया गया है कि आजकल हमारे ज़राए इबलाग़ बिलख़सूस हिन्दी और अंग्रेज़ी अख़बारात के हवाले से दार-उल-उलूम देवबंद की तरफ़ से दिए गए अक्सर फतावी ((फतवों)पर ग़लत अंदाज़ से तब्सिरे किए जा रहे हैं, मसलन एक से ज़्यादा शादी करने पर नफ़सियाती , समाजी और मुआशरती पहलूओं को पेशे नज़र रखते हुए इस्लामी तालीमात की रोशनी में दिए गए फतवों पर ग़ैर मुहतात अंदा ज़मीं ग़ैर ज़रूरी तब्सिराओं के साथ ख़बरें शाय की जा रही हैं |

जिनका मक़सद दार-उल-उलूम की तालीमात की इफ़ादीयत और हमा ग़ैरियत को निशाना बनाया जा सके। जबकि मफ़त्यान किराम के फतावी हर शख़्स के हालात के पेशे नज़र इस अंदाज़ पर दिए गए हैं जिन से वो दायरा इस्लाम में रहते हुए ऐसा कोई क़दम ना उठाए जिससे शरई क़वानीन की ख़िलाफ़वर्ज़ी हो, इस तरह की ख़बरों को ग़ैर हक़ीक़त और ग़ैर शरई उनवानात के साथ नुमायां करना अख़बारात , ख़ासकर हिन्दी और अंग्रेज़ी अख़बारात का तरह इम्तियाज़ बनता जा रहा है।

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