Friday , October 20 2017
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दिलसुखनगर बम धमाके शहीद मुहम्मद एजाज़ के वालिद मुलाज़मत के लिए चक्कर काटने पर मजबूर

दिलसुख नगर बम धमाकों की 21 फ़ेब्रुअरी को पहली बरसी होने वाली है। एक साल क़ब्ल यानी 21 फ़ेब्रुअरी 2013 को पेश आए दो ख़तरनाक बम धमाकों में 17 मासूम शहरी मारे गए थे और कम अज़ कम 19 शदीद ज़ख़्मी हो गए थे।

दिलसुख नगर बम धमाकों की 21 फ़ेब्रुअरी को पहली बरसी होने वाली है। एक साल क़ब्ल यानी 21 फ़ेब्रुअरी 2013 को पेश आए दो ख़तरनाक बम धमाकों में 17 मासूम शहरी मारे गए थे और कम अज़ कम 19 शदीद ज़ख़्मी हो गए थे।

इस वाक़िया में कॉलेज के तीन तलबा भी अपनी ज़िन्दगियों से महरूम हुए इन तलबा में अंबरपेट के रहने वाले स्कूटर मेकानिक मुहम्मद असग़र अली और नूरजहां बेगम के फ़र्ज़ंद मुहम्मद एजाज़ भी शामिल थे। जिन की मौत ने मुहम्मद असग़र अली के घर को वीरान कर दिया इस घर में आज भी ख़ामूशी बसेरा किए हुए है।

कोई दिन ऐसा नहीं जाता जब उन के माँ बाप की आँखों से आँसू नहीं जाते। एस जी एम पॉलीटेक्नीक कॉलेज हयात नगर में ऑटो मोबाईल इंजीनीयरिंग के दूसरे साल में ज़ेरे तालीम एजाज़ अपनी वालिदैन की उम्मीदों का मर्कज़ थे माँ बाप को यक़ीन था कि उन का होनहार बेटा अपनी तालीमी सलाहियतों और अख़लाक़ से वालिदैन का नाम रौशन करेगा। उन का सहारा बनेगा लेकिन क़ुदरत को कुछ और ही मंज़ूर था।

अपने कॉलेज से वो उस बदनसीब दिन ज़ीराक्स के लिए दिलसुख नगर बस स्टप के करीब उतरा ही था कि इंसानियत के दुश्मन दरिंदों के नसब कर्दा बम की ज़द में आ गए और अपनी माँ बाप और भाई को रोते बिलकते छोड़ गए। मासूम और बेक़सूर इंसानों को बम धमाकों के ज़रीए मौत की नींद सुला देना और इंसानियत को नुक़्सान पहुंचाने के अमल को दहश्तगर्दी कहा जाता है।

लेकिन जब दहश्तगर्दी का शिकार होने वाले अफ़राद के साथ ना इंसाफ़ी, उन्हें उन के हक़ से महरूम कर दिया जाता तो उसे क्या कहा जाना चाहीए। ये ऐसा सवाल है जिस का जवाब हुकूमत और आला ओहदादार ही दे सकते हैं।

हमें उन लोगों पर अफ़सोस होता है जो वक़्फ़ बोर्ड और दीगर इदारों में पैरोकारी करते हुए अपने जेब भर लेते हैं और इन कामों की बुनियाद पर ख़ुद को समाजी कारकुन और सयासी क़ाइद कहने में किसी किस्म की शर्म महसूस नहीं करते। काश ऐसे क़ाइदीन हक़ीक़त में मुहम्मद असग़र अली जैसे लोगों की मदद करते हुए उन की नुमाइंदगी करते तो कितना बेहतर होगा। कुछ नेक कामों का तो उन्हें अज्र मिलता।

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